- 2016 व 2017 की यूपी बोर्ड की दूसरी मार्कशीट हासिल करना आसान नहीं

- क्यूआर कोडयुक्त मार्कशीट दिल्ली की प्राइवेट एजेंसी कर रही जारी

- आठ सौ किमी दूरी तय करने में अंकपत्रों को लग रहा महीनों

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VARANASI

द्वितीय मार्कशीट हासिल करने में छात्रों को यूपी बोर्ड के ऑफिस का महीनों चक्कर लगाना पड़ रहा है. जबकि संशोधन क्षेत्रीय कार्यालय में महज चार घंटे में हो जा रहा है. प्राइवेट एजेंसी से क्षेत्रीय कार्यालय को क्यूआर कोडयुक्त मार्कशीट मिलने में चार-चार महीने लग जा रहे हैं. जबकि दिल्ली से बनारस की दूरी लगभग आठ सौ किमी है. जो एक दिन में पूरी हो जाती है. दरअसल फर्जीवाड़ा रोकने के लिए बोर्ड सन् 2016 से क्यूआर कोडयुक्त अंकपत्र जारी कर रहा है. बोर्ड ने अंकपत्र बनाने का जिम्मा नई दिल्ली स्थित एक प्राइवेट एजेंसी को सौंपा है. पूरे प्रदेश के दसवीं व बारहवीं के परीक्षार्थियों का अंकपत्र व प्रमाणपत्र अब दिल्ली से ही जारी किए जाते हैं. बोर्ड के ऑफिसर्स का कहना है कि वर्ष 2016 व 2017 के अंकपत्र अब भी दिल्ली से आ रहा हैं. ऐसे में जब 50 से 100 मार्कशीट एक साथ इकट्ठा हो जाता है तो बनाने के लिए एजेंसी को भेजा जाता है. वहीं एजेंसी पर पूरे प्रदेश का भार होने के कारण उसे जारी करने में लेट होता है. लेट होने के कारण कई बार इलाहाबाद मुख्यालय फोन कर शिकायत दर्ज करानी पड़ती है. बहरहाल जो भी हो इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है. क्षेत्रीय कार्यालय, वाराणसी में अंकपत्र संशोधन व द्वितीय अंकपत्र बनवाने के लिए 26 जिलों के छात्र आते रहते हैं. अमेठी, सुल्तानपुर, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया जैसे जनपदों ने आने वाले छात्रों के लिए डेली बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय का चक्कर लगाना आसान नहीं होता है.