बरेली: सिर्फ 16 बरस की प्रियांशी का इसमें कोई दोष नहीं. शायद यह हमारी देन है. अपने तौर-तरीकों से हमने कॉम्पिटीशन को कब ईष्र्या और हताशा में बदल दिया हमें खुद नहीं पता. फेल-पास होना तो ठीक है, लेकिन नंबर कम आने पर किसी बच्चे को दूसरे से कमजोर समझना गलत. एक फौजी की बेटी होने के बावजूद प्रियांशी शायद ऐसी तुलना से जन्मे दबाव को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं थी. हाईस्कूल में 67 प्रतिशत नंबर के लाने के बावजूद छत पर बने कमरे में उसने मिट्टी का तेल उड़ेलकर खुद को आग लगा ली. उसे किसी तरह डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल तो लाया गया लेकिन कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई. दरअसल, प्रियांशी के साथ ही उसकी चचेरी बहन वंशिका का भी रविवार दोपहर यूपी बोर्ड दसवीं का रिजल्ट आया था. प्रियांशी 67 प्रतिशत अंक पाकर फ‌र्स्ट डिविजन पास हो गई और वंशिका के 75 प्रतिशत के साथ. बस, यहीं से प्रियांशी अपसेट हो गई. उस पर तुलना किए जाने का खौफ हावी था और कुछ घंटे बाद शाम करीब साढ़े सात बजे उसने यह जानलेवा कदम उठा लिया. इस दौरान उसने घर पर सबसे बात भी की और उनके साथ नाश्ता भी.

फौजी पिता मुंबई में तैनात

प्रियांशी फरीदपुर के मोहल्ला बकसरिया के रहने वाले फौजी मुकेश तिवारी की बेटी थी. पिता इन दिनों मुंबई में तैनात हैं. उसके घर पर मां और अपने दो बड़े भाई और एक छोटी बहन हैं. प्रियांशी अपनी चचेरी बहन वंशिका फरीदपुर के ही किशोर चंद कन्या इंटर कॉलेज में पढ़ती थी. दोनों एक साथ एक ही कोचिंग सेंटर में पढ़ने जाती थीं.

शव को मॉर्चरी में रखा गया

प्रियांशी का शव डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की मोर्चरी में रखवा दिया गया है. सोमवार सुबह उसका पोस्टमार्टम होगा. पिता मुकेश तिवारी अभी मुंबई में ही हैं. फरीदपुर पुलिस घटना की जांच में जुटी है.