मेरठ के सौरभ चौधरी ने स्वर्ण और विहान शार्दुल ने जीता रजत

मुज्जफरनगर की महिला पहलवान दिव्या काकरान ने कांस्य

रायबरेली की सुधा सिंह ने 3000 मीटर स्टीपल चेज में जीता रजत

रजत पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम में शामिल हैं वंदना कटारिया

कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम में शामिल हैं वाराणसी के ललित उपाध्याय

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LUCKNOW(1 Sept): इंडोनेशिया (जकार्ता) में हुए एशियन गेम्स में इस बार प्रदेश के खिलाडि़यों ने जलवा बिखेरा. देश के लिए मेडल लाने वाले खिलाडि़यों में यूपी के खेल जगत का खासा योगदान रहा है. एशियन गेम्स में सबसे कम उम्र में मेडल लाने वाले खिलाड़ी भी यूपी के लाल हैं, वहीं दूसरी ओर एशियन गेम्स 2018 में देश को पहला मेडल दिलाने वाले खिलाड़ी ने भी यूपी में ही खेल करियर की शुरुआत की थी. कुल मिलाकर यूपी में खेलों को लेकर जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है. हरियाणा, पंजाब के बाद अब यूपी से भी खिलाड़ी निकल कर देश का नाम रोशन कर रहे हैं. अब तक यूपी को केवल हॉकी के गढ़ के रूप में पहचाना जाता है, लेकिन इस बार एशियन गेम्स में खिलाडि़यों ने अन्य खेलों में पदक जीत कर इसे झूठा साबित कर दिया. शूटिंग, एथलेटिक्स और कुश्ती में यहां के खिलाडि़यों ने बाजी मारी.

यूपी के मेडल जीतने वाले खिलाड़ी

1. सौरभ चौधरी-मेरठ-दस मीटर एयर पिस्टल-स्वर्ण

17 साल के सौरभ चौधरी मेरठ के निवासी हैं. उन्होंने जकार्ता में आयोजित निशानेबाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण जीत कर प्रदेश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया. उन्होंने दस मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण जीत कर देश के साथ प्रदेश का नाम भी राेशन किया.

2. दिव्या काकरान-मुज्जफरनगर- कुश्ती- कांस्य

मुजफ्फरनगर की रहने वाली दिव्या काकरान ने जकार्ता में कांस्य पदक पर कब्जा किया. 53 केजी वेट कैटेगरी में उन्होंने चीनी ताइपे की पहलवान चेन वेलिन को शिकस्त देकर यह खिताब हासिल किया. पैर में चोट होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी. खास बात यह है कि महिला कुश्ती टीम का कैम्प साई में लगा था. ऐसे में दिव्या का लखनऊ से गहरा नाता रहा है.

3. शार्दुल विहान-मेरठ- डबल ट्रैप- रजत

16 वर्षीय सौरभ चौधरी को सबसे कम उम्र का निशानेबाज कहा जा रहा था कि मेरठ के किशोर शार्दुल विहान ने उनका भी रिकार्ड तोड़ दिया. मात्र 15 साल की आयु में भारतीय पुरुष टीम में शामिल मेरठ के शार्दुल विहान ने डबल ट्रैप में रजत पदक जीत कर सभी को हैरत में डाल दिया.

4. सुधा सिंह-रायबरेली- 3000 मीटर स्टीपल चेज-रजत

रायबरेली की रहने वाली सुधा सिंह ने जकार्ता में 3000 मीटर स्टीपल चेज में रजत पदक जीत कर उन्होंने घर वापसी की राह आसान कर ली. सुधा सिंह इससे पहले भी एशियन गेम्स में इसी इवेंट में स्वर्ण पदक जीत चुकी है. सुधा सिंह का भी लखनऊ से गहरा नाता रहा है. यहां के केडी सिंह बाबू हॉस्टल में रह कर उन्होंने ट्रेनिंग लेना स्टार्ट किया.

5. ललित उपाध्याय-वाराणसी-हॉकी- कांस्य

वाराणसी के रहने वाले ललित उपाध्याय भारतीय हॉकी टीम में शामिल रहे. पाकिस्तान को हराकर कांस्य जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम में ललित उपाध्याय भी शामिल रहे. नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर खासा अनुभव रखने वाले ललित उपाध्याय ने अपने शहर से ही हॉकी की ट्रेनिंग लेना शुरू किया.

वंदना कटारिया- हॉकी-रजत

वंदना कटारिया उत्तराखंड की रहने वाली है. लेनिक उन्होंने हॉकी हमेशा प्रदेश के लिए खेली. जकार्ता के रजत पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम में वह शामिल रही. उन्होंने हॉकी की ट्रेनिंग केडी सिंह बाबू स्टेडियम में महिला हॉस्टल में एडमीशन लिया और यहीं से इंडिया कैम्प में जगह बनाई. हॉकी के पूर्व कोच विष्णु शर्मा से उन्होंने ट्रेनिंग ली.

बाक्स

इनका भी यूपी से गहरा नाता

सीमा पुनिया-हरियाणा-चक्का फेंक- रजत

जकार्ता में रहने वाली सीमा पुनिया का विवाह मेरठ में रहने वाले खिलाड़ी अंकुश पुनिया से हुआ. उसके बाद से वह यूपी के लिए ही खेल रही है. जकार्ता में आयोजित एशियन गेम्स में सीमा पुनिया ने इस बार रजत पदक जीता.

बजरंग पुनिया- हरियाणा-कुश्ती-स्वर्ण

जकार्ता में आयोजित एशियन गेम्स में देश को पहला स्वर्ण दिलाने वाले पहलवान बजरंग पुनिया ने उत्तर प्रदेश से खेलों की शुरुआत की. गोंडा के नंदिनी नगर में रह कर उन्होंने कुश्ती के दांव पेंच सीखे. अवध विश्वविद्यालय से खेलते हुए उन्होंने स्वर्ण पदक जीता.

विनेश फोगाट- हरियाणा-कुश्ती-स्वर्ण

50 केजी वेटकैगिरी में एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली विनेश फोगाट ने लगभग सात साल का समय लखनऊ के साई सेंटर में गुजारा है. यहां पर कैडेट से लेकर सीनियर महिला कुश्ती के कैम्प में वह शामिल रही. विनेश के स्वर्ण जीतने के बाद लखनऊ के साइ सेंटर में मिठाइयां बांटी गई. यहां के खिलाड़ी बेसब्री से उनका इंतजार कर रहे है.

कोट

यूपी के खिलाडि़यों ने इस बार जमकर मेडल बटोरे हैं. इन खिलाडि़यों ने देश के साथ प्रदेश का नाम भी ऊंचा किया है. जल्द ही इन खिलाडि़यों को नौकरी के साथ ही कैश प्राइज देकर सम्मानित किया जाएगा.

डॉ. आरपी सिंह

निदेशक

उत्तर प्रदेश खेल निदेशालय

कोट

यूपी में प्रतिभाओं की कमी नहीं है. एक से एक खिलाड़ी यहां पर मौजूद है. बस जरूरत है उन्हें सही दिशा दिए जाने की. इंफ्रा स्ट्रक्चर और एडवांस कोचिंग की व्यवस्था हो तो प्रदेश के खिलाड़ी चीनी खिलाडि़यों को मात देने का दम रखते हैं.

टीपी हवेलिया

उपाध्यक्ष

उत्तर प्रदेश ओलम्पिक एसोसिएशन

जो खिलाड़ी प्रदेश के नहीं है लेकिन कहीं ना कहीं किसी तरह से वह यूपी जुड़े रहे हैं. ऐसे में यह साबित हो गया है कि यूपी में खेलों का माहौल है. बस जरूरत है इसे और बेहतर किए जाने की.

सैयद अली

पूर्व ओलम्पियन