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LUCKNOW : यूपी पॉवर कॉरपोरेशन के छह दर्जन से ज्यादा अभियंता विजिलेंस के राडार पर हैं। अलग-अलग मामलों में इनके खिलाफ जांच के आदेश हैं, ज्यादातर पर सरकारी धन को नुकसान पहुंचाने, घूस लेकर बिल्डरों को लाभ पहुंचाने और भ्रष्टाचार कर अकूत संपत्ति बटोरने का आरोप है। जल्द ही इन पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। बता दें कि दो दिन पहले इसी के तहत सात अभियंताओं को सस्पेंड किया गया था।

पिछले वर्ष खुला था मामला

पिछले वर्ष एसटीएफ ने छापा मारकर कानपुर से कई अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था और उनके गोदामों से बिजली विभाग के तार, केबिल, बिजली उपकरण व अन्य सामान भारी मात्रा में पकड़ा गया था। पता चला कि बिजली विभाग के इंजीनियर और बड़े अधिकारी सरकारी योजनाओं के लिए आए सामान को गलत तरीके से बेच देते हैं। इससे वह करोड़ों रुपए की अवैध कमाई करते हैं और सरकारी धन को नुकसान पहुंचाते हैं। यह सामान दिल्ली में सप्लाई किया जाता था और वहां से फिर सरकारी विभागों को सप्लाई कर दिया जाता है। मामले में अभी भी एसआईटी जांच कर रही है। इसके अलावा प्रदेश भर के विभिन्न विभिन्न जिलों से अलग अलग मामलों से अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार कर अकूत संपत्ति बटोरने के आरोप लगे हैं। अलग अलग शिकायतें मिलने पर यूपी पावर कारपोरेशन ने सभी की विजिलेंस इंक्वायरी के आदेश दिए थे, जिसके बाद ही दो दिन पहले सात अभियंताओं को सस्पेंड किया गया था। सूत्रों की मानें तो जल्द ही बड़ी संख्या में अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।

जेई से लेकर चीफ तक

इनमें करीब आधा दर्जन से ज्यादा चीफ इंजीनियर, दो दर्जन से ज्यादा एग्जीक्यूटिव इंजीनियर या अधिशासी अभियंता हैं। बड़ी संख्या में सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर से लेकर जेई तक के अधिकारी शामिल हैं। अलग अलग शिकायतों की जांच विजिलेंस की टीमें जांच कर रही हैं। इसमें उनके द्वारा दिए गए ठेकों, लोड स्वीकृत करने, नई लाइनें बिछाने, ट्रांसफार्मर, पोल लगाने, स्वीकृत कराए गए पैकेज का फिजिकल वेरीफिकेशन, सहित अन्य अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है।

लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा निशाने पर

अधिकारियों की मानें तो भ्रष्ट अधिकारियों में सबसे अधिक अधिकारी राजधानी लखनऊ, गाजियाबाद और नोएडा के हैं या फिर इन जिलों में रह चुके हैं और वर्तमान में दूसरे जिलों में तैनात हैं। इनके पास अकूत संपत्ति होने के आरोप लगे हैं। कईयों ने बड़े बड़े फार्म हाउस, इंजीनियंरिंग कॉलेज तक बना डाले हैं। इंजीनियरों ने अपनी पत्नी, बच्चों के नाम पर प्रापर्टी खरीदी हैं। इतना धन वे कहां से लाए हैं इसका ब्यौरा अब वे नहीं दे पा रहे हैं।

ऐसे करते हैं उगाही

सरकारी सामान को ठेकेदारों व अन्य दलालों को बेचना, लोड सैंक्शन करने के नाम पर घूस लेना आम बात है। साथ ही बड़ी कमाई के लिए बहुत से इंजीनियर्स ने सरकारी धन पर प्राइवेट बिल्डर्स की कॉलोनी में लाइनें बिछा दी। इसके नाम पर वे बिल्डर से रुपए ले लेते हैं जबकि प्राइवेट कॉलोनी में बिजली लाइन, ट्रांसफार्मर लगाने का काम बिल्डर का होता है। गलत तरीके से प्राइवेट कालोनियों में ट्रांसफार्मर लगाने, के भी आरोप हैं।

प्रमुख आरोप
इन सभी पर प्रमुख रुप से भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति, राजस्व को नुकसान पहुंचाने के आरोप है। राजस्व को नुकसान पहुंचाने से लेकर नियमों को ताक पर रख कर ठेकेदारों व निजी फर्मों को लाभ पहुंचाकर अकूत संपत्ति बटोरने का आरोप है।

बिना रिश्वत नहीं होता काम
अधिकारियों के अनुसार ज्यादातर इंजीनियर अभियंता लोड स्वीकृत करने का काम बिना रुपए लिए नहीं करते। प्रति किलोवाट लोड स्वीकृत करने के लिए 1000 रुपए से 1500 रुपए लिए जाते हैं। मामला जब कामर्शियल होता है तो यह कीमतें काफी अधिक होती हैं।

दबा दिया गया था बिलिंग घोटाला
पूर्व की सपा सरकार के दौरान गोरखपुर में बिलिंग में गड़बड़ी करने के घोटाले का एसटीएफ ने खुलासा किया था। लाखों का बिल रिश्वत लेकर हजारों में करने का आरोप लगा था। बाद में बड़े स्तर पर जांच शुरू हुई तो पूर्वांचल के कई जिलों सहित प्रदेश के कई दर्जन जिलों में अधिकारियों पर अरबों रुपए के घोटाले की परतें खुलने लगी। विभाग को कई सौ करोड़ के राजस्व को नुकसान का आरोप लगा था, लेकिन अधिकारियों के दबाव न गिरफ्तारी हुई और न ही आगे कार्रवाई। एसटीएफ ने भी मामले में चुप्पी साध ली।

लखनऊ में भी पकड़ा गया था मामला

हाल ही में लखनऊ के चिनहट में भी तीन अलग अलग मामले पकड़े गए थे। एक मामले में सौभाग्य योजना का ट्रांसफार्मर ही जेई ने एक निजी कालोनी में लगवा दिया था। जिसके बाद जेई को सस्पेंड कर दिया गया था जांच चल रही है।
गर्मी से बिजली का पारा हुआ गर्म
'रूटीन आधार पर जो भी शिकायतें आती हैं उनकी जांच की जाती है। पिछले वर्ष के मामले की जांच पनकी पुलिस कर रही है, जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।'
- आलोक कुमार, चेयरमैन , यूपीपीसीएल

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