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LUCKNOW : नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद माना गया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा भारतीय बाजार में नकली नोट खपाने की साजिश की कमर टूट गई। पर, महज डेढ़ साल बीतते-बीतते एक बार फिर आईएसआई सक्रिय हो गई है। हालांकि, पहले नेपाल के जरिये होने वाली नकली नोटों की तस्करी के ट्रांजिट रूट में देश के दुश्मनों ने बदलाव किया है। अब बांग्लादेश और म्यांमार से नॉर्थ ईस्ट के रास्ते नकली नोट देश में दाखिल कराकर अर्थव्यवस्था को चौपट करने की साजिश रची जा रही है। यूपी एसटीएफ द्वारा हाल ही में पकड़े गए कई नकली नोटों के सौदागरों से हुई पूछताछ में यह तथ्य सामने आया है। जांच में यह भी पता चला है कि पश्चिम बंगाल का मालदा और फरक्का नकली नोटों का हब बन गया है। अब एसटीएफ मालदा में मौजूद इन नकली नोटों के मुख्य सप्लायरों को दबोचकर इस पूरे गोरखधंधे पर से पर्दा उठाने की तैयारी में है।

सख्ती बढ़ी तो रूट बदला
एसटीएफ ने बीती 24 अगस्त को डालीगंज क्रॉसिंग के करीब घेराबंदी कर नकली नोटों के चार तस्करों को दबोचा था। टीम ने उनके कब्जे से 4।60 लाख रुपये बरामद किये। पूछताछ में आरोपियों ने कुबूल किया था कि बरामद नकली नोट वह पश्चिम बंगाल के मालदा से लाते थे। एसटीएफ ने जांच को आगे बढ़ाया तो पता चला कि आईएसआई ने एसएसबी की सख्ती के चलते अब नकली नोटों को भारत में दाखिल कराने के लिये अपने पुराने पसंदीदा रूट नेपाल को बदल दिया है। अब आईएसआई ने बांग्लादेश और म्यांमार बॉर्डर को इसके लिये इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। जांच में पता चला है कि बांग्लादेश और म्यांमार के जरिए नकली नोटों की खेप नॉर्थ ईस्ट के राज्यों असोम, मेघालय और मिजोरम के रास्ते भारत में दाखिल कराई जाती है।

आतंकी संगठनों की मदद
जांच में यह भी पता चला है कि इस्लामिक स्टेट का बांग्लादेश स्थित मॉड्यूल जमात उल मुजाहिदीन आईएसआई को नकली नोटों के कारोबार में मदद करता है। जबकि, देश में इंडियन मुजाहिदीन के स्लीपर सेल इस कारोबार में तस्करों की मदद करते हैं। म्यांमार में रोहिंग्या उग्रवादियों के जरिये नकली नोटों की खेप भारत में दाखिल कराई जाती है। इन नकली नोटों के देश में दाखिल होने के बाद इन्हें मालदा व फरक्का में बैठे नकली नोटों के सौदागरों तक पहुंचाया जाता है। पश्चिम बंगाल के यह दोनों जिले नकली नोटों के हब बन चुके हैं। यहीं से पूरे देश में नोटों की सप्लाई की जाती है। जांच में यह भी पता चला कि इन नोटों को कैरियर से डिलीवरी पहुंचाने की सुविधा भी मुहैया कराई जाती है। हालांकि, इसके एवज में इन कैरियरों को प्रति लाख 10 हजार रुपये तक की फीस दी जाती है।

मुख्य सौदागर तक पहुंचने की कोशिश में एसटीएफ
एसएपी एसटीएफ अभिषेक सिंह ने बताया कि मालदा व फरक्का में बैठे नकली नोटों के सौदागरों को पकडऩे पर ही इस अवैध कारोबार पर लगाम लगाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि इन सौदागरों का सुराग लगाने की कोशिश की जा रही है। इनके पकड़े जाने पर इस गोरखधंधे के तमाम किरदार सामने आ सकेंगे।

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