-रेशम कटरा के व्यापारी ने कैंट डिपो की जनरथ एसी बस से आगरा भेजा था दस लाख की नगदी और पंद्रह किलो चांदी, बीच रास्ते से हुआ गायब

-कुछ साल पहले नेपाल भेजा गया 25 किलो सोना भी हुआ था गायब

रोडवेज बसों का इस्तेमाल सिर्फ सवारी ढोने के लिए नहीं बल्कि चोरी-छुपे कीमती सामानों को भी भेजने में हो रहा है. बसों के जरिए बनारस से दूसरे जगहों तक सोने-चांदी की तस्करी जोरों पर है. रेलवे फोर्स की सक्रियता के चलते पकड़े जाने के डर से तस्करों ने अब रोडवेज का सहारा ले लिया है. चंद रुपये की लालच में चालक-परिचालक भी तस्करों को सारी सुविधा मुहैया करा देते हैं. सराफा व्यापारी का जनरथ एसी बस से भेजा हुआ चांदी और कैश रास्ते से गायब हुआ तो हल्ला मच गया और तस्करी का खुलासा हो गया. मामले की भनक रोडवेज अधिकारियों को भी लगी. माल लोड कराने का व्यापारी ने आरएम ऑफिस से सीसीटीवी फुटेज भी निकाला है. यह भी स्वीकारा कि आगे भी माल भेजते थे.

ताजा मामला पांच सितंबर को रेशम कटरा के सराफा कारोबारी का जनरथ एसी बस से दस लाख कैश व पंद्रह किलो चांदी की सिल्ली गायब होने के बाद रोडवेज में हड़कंप मचा हुआ है. रोडवेज पुलिस चौकी पर पहुंचे व्यापारी ने उक्त बस के चालक-परिचालक के खिलाफ रास्ते से माल गायब होने की शिकायत दर्ज कराई, हालांकि माल भेजने का व्यापारी के पास भी कोई कागज या टोकन नहीं था इस लिहाज से पुलिस भी मामले में बहुत फास्ट होती नहीं दिख रही. हालांकि रोडवेज अधिकारियों के कान तक मामला पहुंचने के बाद कार्रवाई की तलवार चालक-परिचालक पर लटकने लगी है. दो दिन पूर्व रोडवेज पुलिस चौकी पर व्यापारी और चालक-परिचालक से पूछताछ भी हुई थी.

डिग्गी से माल हुआ गायब

सीसीटीवी फुटेज में दिखा है कि कैंट डिपो के पानी टंकी के पास जनरथ बस की लगेज बॉक्स में व्यापारी ने दो बोरे रखे. उसके बाद बस सीधे रोडवेज बस स्टेशन पर आकर खड़ी हो गई. यहां से लगेज बॉक्स बिना खुले बस आगरा के लिए रवाना हुई. लगेज बॉक्स की चाभी ड्राइवर के पास होती है. पुलिस की इंक्वायरी में ड्राइवर ने कबूला कि चाभी मेरे पास रहती है लेकिन सामान के बारे में मुझे नहीं पता. हालांकि परिचालक के बयान पर पुलिस को शक है. उधर, कारोबारी भी कुछ भी खुलकर बताने से कतरा रहा है. इस मामले को लेकर मुख्यालय तक रोडवेज की किरकिरी हो रही है.

कई बार भेज चुका था माल

पुलिस की पूछताछ में सराफा कारोबारी ने स्वीकारा कि टैक्स बचाने के चक्कर में ऐसे ही कई बार माल भेजता था. इसके एवज में हजार-पांच सौ रुपये चालक-परिचालक के पीछे खर्चा कर देते थे. ऐसा सिर्फ अकेले हम ही नहीं बल्कि कई अन्य कारोबारी है जो रोडवेज से ही माल भेजते है. चेकिंग का झंझट नहीं होने के कारण सबसे मुफीद मार्ग यही लगा था. लेकिन दस लाख कैश और पंद्रह किलो चांदी की सिल्ली गायब होने के बाद गलती का एहसास अब समझ आ रहा है.

कार्गो से नहीं भेजते हैं माल

चंद रूपये की लालच में चालक-परिचालक कुछ भी लोड कर लेते है. सबसे अधिक यह खेल जनरथ की एसी बसों में चल रहा है. रोडवेज बस स्टेशन पर कार्गो कोरियर सर्विस होने के बावजूद कुछ व्यापारियों ने चालकों-परिचालकों से सीधे सेटिंग कर माल चोरी-छिपे लोडिंग-अनलोडिंग कराते हैं. इसकी शिकायत कार्गो कोरियर के मैनेजर ने कई दफा आरएम सहित मुख्यालय तक को की है.

नेपाल कांड की याद ताजा

कुछ साल पहले ऐसा ही कांड नेपाल जाने वाली बस में हुआ था. शहर के सराफा कारोबारी का 25 किलो सोना काठमाण्डू भेजा जा रहा था जो कि रास्ते से गायब हो गया था. उस समय भी चालक-परिचालक पर तोहमत लगा था. हालांकि पक्की बिल नहीं होने के कारण उस दौरान कारोबारी कहीं शिकायत करने नहीं गया था. लेकिन इस तरह के क्राइम के बाद रोडवेज बनारस डिविजन में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों का फेरबदल हुआ था.

मामला संज्ञान में है लेकिन व्यापारी ने लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराया है. फिर भी इस मामले में रोडवेज अधिकारियों की मौजूदगी में चालक-परिचालक से पूछताछ की गई है.

घनानंद त्रिपाठी, इंचार्ज

रोडवेज पुलिस चौकी