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PATNA : इंश्योरेंस की बड़ी रकम हड़पने के लिए धरती के भगवान ने 702 महिलाओं की कोख ही निकाल दी. 6 साल पहले जब यह मामला उजागर हुआ तो मानवाधिकार आयोग ने न्याय की मांग की. उन्होंने पत्र लिखकर कहा कि महिलाओं को न्याय तभी मिलेगा जब दोषी डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल होगा. हुआ वही जो हर जांच के बाद होता है. सब कुछ मैनेज. महिलाओं के कोख की कीमत लगा दी गई और डॉक्टरों पर कार्रवाई की फाइल ठंडे बस्ते में चली गई. फाइलों में बंद कोख घोटाले के पन्नों को जब दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने पलटा तो सामने आया लाचार सिस्टम. कोख निकालने वाले एक भी दोषी डॉक्टर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. सभी आज भी धड़ल्ले से अपनी प्रैक्टिस कर रहे हैं.

ऐसे किया गया खेल

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत गरीबों को हेल्थ कार्ड दिया गया था. इलाज के लिए प्रदेश के सभी जिलों में डॉक्टर एवं नर्सिग होम चिन्हित किए गए थे. इस योजना की सर्वाधिक धनराशि सर्जरी के लिए दी जाती थी. बांका, सारण, सीतामढ़ी, जमुई, सासाराम, बेगूसराय, कटिहार, सहरसा, सुपौल जैसे इलाकों में योजना की अधिक से अधिक राशि हड़पने के लिए डॉक्टरों ने बिना कारण यूट्रस की सर्जरी कर दी. इसके लिए हर जिले में एक बड़ा रैकेट सक्रिय था जिसकी मदद से डॉक्टरों ने इस खेल को अंजाम दिया.

डॉक्टरों पर हुई कार्रवाई नहीं बता सकते

मानवाधिकार आयोग ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को कोख घोटाले से संबंधित सभी डॉक्टरों एवं नर्सिग के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. काउंसिल ने निबंधक बिहार चिकित्सा परिषद पटना को पत्र लिख कार्रवाई करने को कहा था. राज्य स्वास्थ्य समिति ने भी इस मामले में कार्रवाई करने को कहा था. आदेश के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है इसका खुलासा सूचना अधिकार अधिनियम के तहत हुआ. आरटीआई एक्टिविस्ट अजीत सिंह ने परिषद से डॉक्टरों पर कार्रवाई की जानकारी मांगी. 14 मई 2018 को जवाब आया जिसमें कठिनाई की बताकर मुआवजे की डिटेल दे दी गई. कार्रवाई क्या हुई यह आज भी राज है.

मामले ने मचाई खलबली

मामले का खुलासा 2011-12 में हुआ. मामला संज्ञान में आते ही बिहार मानवाधिकार आयोग ने कार्रवाई शुरु कर दी. केंद्र सरकार ने इस मामले की जांच सभी जिलों के जिला पदाधिकारी एवं सिविल सर्जन से कराने के लिए बिहार सरकार को आदेश जारी कर दिया. इस पर सरकार ने श्रम संसाधन विभाग के माध्यम से संबंधित जिले को जांच रिपोर्ट देने का आदेश दिया.

1 कोख की कीमत 50 हजार

मानवाधिकार आयोग ने इस बड़े मामले में 28 अप्रैल 2018 को आदेश दिया कि 20 वर्ष से 40 वर्ष की पीडि़त 419 महिलाओं को प्रति पीडि़त ढाई लाख रुपए तथा 40 वर्ष से अधिक उम्र की पीडि़त 116 महिलाओं को प्रति पीडि़त डेढ़ लाख रुपए देने का आदेश दिया. इस पर स्वास्थ्य विभाग ने प्रति पीडि़ता के कोख की कीमत पचास हजार रुपए लगा दी.