86 फीसदी व्यापारियों का रिटर्न है मिसमैच, इलाहाबाद के भी सैकड़ो व्यापारी इसके शिकार

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ALLAHABAD: जीएसटी में लगातार चल रहे उलटफेर के साथ ही टेक्निकल समस्या से व्यापारियों की समस्या लगातार बढ़ रही है. वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद अब व्यापारियों के सामने नई समस्या है. पूरे देश में व्यापारियों ने अब तक जो रिटर्न जमा किया है, उसमें 86 प्रतिशत का रिटर्न मिसमैच है. जीएसटी काउंसिल की 27वीं बैठक में यह तथ्य सामने आया है. इलाहाबाद में भी ऐसे सैकड़ो व्यापारी हैं, जिनका रिटर्न मिसमैच है.

..तो फंस जाएगी आईटीसी

जानकारों की मानें तो जीएसटी रिटर्न मिसमैच होने से व्यापारियों की समस्या बढ़ने के साथ ही उनकी आईटीसी भी फंस सकती है. जब तक रिटर्न क्लीयर नहीं होगा, तब तक व्यापारी आईटीसी का लाभ नहीं ले सकेंगे.

नया रजिस्ट्रेशन, परचेज पुराना

रिटर्न मिसमैच होने का सबसे बड़ा कारण व्यापारियों का जीएसटी में नया रजिस्ट्रेशन कराना बताया जा रहा है. जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद सितंबर अक्टूबर तक व्यापारियों का जीएसटी में रजिस्ट्रेशन किया गया. रजिस्ट्रेशन तो सितंबर-अक्टूबर में हुआ लेकिन जुलाई से अगस्त तक व्यापारियों ने जो बिजनेस किया, उसे भी सितंबर में जोड़ कर रिटर्न में दाखिल कर दिया. नए रजिस्ट्रेशन में पुरानी खरीद बिक्री जाने से व्यापारियों के सामने समस्या खड़ी हो गई है.

प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन किए कैंसिल

रिटर्न मिस मैच होने का एक और बहुत बड़ा कारण है प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन. इसके तहत व्यापारियों को प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन नंबर जारी किया गया था. ताकि व्यापारी रजिस्ट्रेशन में आ रही कमियों को पूरा करने के साथ ही प्रॉपर तरीके से रजिस्ट्रेशन करा सकें. प्रोविजनल में सुधार न होने पर रजिस्ट्रेशन ही कैंसिल कर दिया गया. व्यापारियों को पता ही नहीं चला.

व्यापारियों की समस्या का समाधान न होने के कारण ही रिटर्न मिसमैच की समस्या आ रही है. क्योंकि रजिस्ट्रेशन के दौरान काफी लापरवाही बरती गई. रिटर्न मिसमैच होने पर अब खरीद बिक्री का क्या होगा? परचेज कनफर्म नहीं होगा तो कैरी फारवर्ड नहीं हो पाएगा.

संतोष पनामा

संयोजक, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति