चुनाव हार गए
पीडीएफ कोटे से रावत मंत्रिमंडल में मंत्री रहे प्रीतम पंवार ने चुनाव जीता है लेकिन वे कांग्रेस से नहीं हैं। दूसरी तरफ पीडीएफ के संयोजक रहे मंत्री प्रसाद नैथानी चुनाव हार गए। पीडीएफ कोटे से हरीश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हरीश चंद्र दुर्गापाल भी चुनाव हार गए। धर्मपुर सीट से लगातार तीन बार विधायक रहने वाले रावत सरकार के दमदार नेता और कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल को भी इस बार हार का मुंह देखना पड़ा है। पीडीएफ कोटे से कैबिनेट मंत्री रहे और टिहरी सीट से चुनाव लडऩे वाले निर्दलीय उम्मीदवार दिनेश धनै भी हार गए। ये तो वही बात हो गई कि हम तो डूबे, तुम्हें भी ले डूबे सनम।

uttarakhand election results 2017: उत्‍तराखंड में महाबली के चक्कर में बड़े-बड़ों की बलि
प्रीतम पंवार:
कौन-कौन मंत्री हार गए?
सीट             नाम
विकासनगर     नवप्रभात
बद्रीनाथ        राजेंद्र भंडारी
धर्मपुर          दिनेश अग्रवाल
कोटद्वार         सुरेंद्र सिंह नेगी
लालकुंआ      हरीश चंद्र दुर्गापाल
टिहरी           दिनेश धनै
देवप्रयाग        मंत्री प्रसाद नैथानी

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हरीश चंद्र दुर्गापाल:
दो मंत्री थे आमने-सामने
इस बार के चुनाव में कई बातें बड़ी दिलचस्प रहीं। कांग्रेस से बगावत कर बीजेपी में शामिल हुए हरक सिंह रावत ने अपने ही सबसे करीबी रहे कांग्रेसी नेता और रावत सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे सुरेंद्र सिंह नेगी को हरा दिया। दोनों कोटद्वार सीट से आमने-सामने थे।

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हरक सिंह रावत:
हार गए दोनों कप्तान
बात करें कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों की तो दोनों के कप्तान सूबे में चुनाव हार गए। बीजेपी के कप्तान यानि बीजेपी के प्रदेश मुखिया और नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट रानीखेत से चुनाव हार गए। यहां से कांग्रेस के करन सिंह महरा विजयी हुए। दूसरी तरफ कांग्रेस के कप्तान यानि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी चुनाव हार गए। उपाध्याय को दून की सहसपुर सीट से बीजेपी के सहदेव पुंडीर ने हरा दिया। ये हार भी छोटी नहीं थी। उपाध्याय 18 हजार से ज्यादा वोट्स से हार गए।

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करन सिंह महरा:
मोदी लहर के बाद भी हारे भट्ट

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट की हार से कई बड़े सवाल भी खड़े हुए हैं। पूरे प्रदेश में पीएम मोदी की जोरदार लहर रही, इसके बावजूद अजय भट्ट चुनाव हार गए। अजय भट्ट को पार्टी हमेशा बचाती रही। कमजोर नेता प्रतिपक्ष साबित होने के बाद भी पार्टी ने न तो भट्ट को प्रतिपक्ष के नेता पद से हटाया और न ही प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से। बड़ा सवाल ये है कि कांग्रेस की परंपरागत सीटों पर भी बीजेपी के कमजोर प्रत्याशी चुनाव जीत गए और दो बार से रानीखेत के विधायक रहे बीजेपी के कद्दावर नेता भट्ट धूल चाट गए।

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अजय भट्ट:

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