- फ्लाईओवर हादसा से स्तब्ध थे पास में मौजूद वसुंधरा कॉलोनी के निवासी

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VARANASI

रोज की तरह मंगलवार की शाम कॉलोनी में बच्चे खेल रहे थे, महिलाएं आपस में बात कर रहीं थीं तभी तेज आवाज हुई. एक बारगी लगा कि भूकम्प आ गया हो. दौड़कर सभी घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां का मंजर दिल दहला देने वाला था. लोगों के चेहरे पर हादसे का दर्द साफ नजर आ रहा था. यह बातें हादसे के करीब मौजूद वसुंधरा कॉलोनी में रहने वाली निशा राय ने कहीं. हादसे के दूसरे दिन बुधवार को दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम मौके पर पहुंची तो लोग घटना के बारे में बताते हुए भावुक हो उठे.

असहाय खड़े रहे सब

डॉ. महमूद व दिवाकर ने बताया कि हादसे के बाद वहां मौजूद सब असहाय थे. चाहकर भी हम लोग कुछ नहीं कर पा रहे थे. बीम के नीचे दबे वाहनों में सवार लोग कराह रहे थे. लेकिन चाहकर भी लोग कुछ न कर सके. सुमन देवी और सीता यादव ने कहा कि करीब 45 मिनट बाद पुलिस पहुंची. तब राहत कार्य शुरू हुआ. बिन्दु केसरी ने कहा कि हम लोग सिर्फ 'सिस्टम' के पहुंचने का इंतजार करते रहे.

दूसरे दिन भी पसरा रहा सियापा

कैंट रेलवे स्टेशन के पास स्थित वसुंधरा कॉलोनी गेट नम्बर एक के आसपास के एरिया में बुधवार को सियापा पसरा रहा. सभी के चेहरों पर मंगलवार को हुई घटना का खौफ साफ दिखा. फ्लाईओवर के गिरे बीम और उसके आसपास तमाशबीनों की भारी भीड़ जमा रही. एहतियात के तौर पर पुलिस भी तैनात रही.

नहीं हटाया स्क्रैप

घटना के बाद से फ्लाईओवर विस्तारीकरण का कार्य रोक दिया गया है. ठेकेदार और मजदूर मौके से फरार हो गए हैं. रूट डायवर्जन होने से इस मार्ग पर आवाजाही भी कम रही. हादसे के बाद भी कार्यदायी संस्था ने आसपास रखे लोहे के स्क्रैप आदि हटाना जरूरी नहीं समझा. बीम भी नहीं हटाया जा सका.