नमस्कार मित्रों, एक सुंदर और बेहतर घर की कल्पना तभी साकार होती है, जब घर में हर वस्तु हो, साथ ही वह सही जगह पर हो और सही व्यवस्था भी बनी रहे। दूसरे कमरों की तरह घर में डाइनिंग हॉल भी महत्वपूर्ण है। वास्तु वाइब्स की दृष्टि से घर में यह सही स्थान पर हो, तो जीवन में लाभ होता है।

अगर उत्तर दिशा में हो डाइनिंग हॉल तो

घर में यदि डाइनिंग हॉल हमने उत्तर दिशा में बनाया है, तो यहां रहने वाले लोगों में अपने करियर को लेकर बहुत जागरूकता बनी रहती है। यहां भोजन करने वाला व्यक्ति अपने करियर को लेकर अपनी दूरदृष्टि का विकास कर लेता है। जीवन में करियर को वह अपनी प्राथमिकता मानकर चलता है, जिससे बाकी समस्याओं पर से उसका ध्यान हट जाता है और यही सोच उसकी कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव लाती है। घर में इसी दिशा से लगा हुआ क्षेत्र हमारे स्वास्थ्य को दर्शाता है।

इस दिशा में डाइनिंग हॉल होने से स्वास्थ्य के प्रति रहते हैं जागरूक

वास्तु टिप्स: जानें किस दिशा में होना चाहिए डाइनिंग हॉल,और इसका क्या पड़ता है प्रभाव

घर में यदि उत्तर से उत्तर-पूर्व के पास हमारा डाइनिंग क्षेत्र है तो यहां भोजन करने वाला अपने स्वास्थ्य को लेकर अधिक जागरूक रहता है और हमेशा अपनी डाइट के प्रति उसके मन में चिंता के भाव बने रहते हैं। उसका पूरा प्रयास रहता है कि वह अपनी खुराक, अपने खान-पान के समय को सही रखे।

उत्तर-पूर्व दिशा का महत्व

जो लोग अपने घरों में उत्तर-पूर्व दिशा में निरंतर खाना खाते हैं, वह धार्मिक प्रवृत्ति वाले होते हैं। यह लोग अपने भोजन के साथ पेय पदार्थ भी लेते हैं। ऐसे लोग सादे खाने को प्राथमिकता देते हैं। बहुत तीखा खाना खाना भी इनके स्वभाव में नहीं होता है।

जंक फूड की तरफ बढ़ता है रुझान

पूर्व दिशा में डाइनिंग हॉल बनवाने से यहां पर रहने वाले व्यक्ति हर समय बाहर का खाना खाने के बारे में सोचते रहते हैं, जिससे इनके स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ता है। जंक फूड की तरफ इनका रुझान बढ़ जाता है। कुछ समय बाद व्यक्ति अपनी सामाजिक बैठकों में बहुत ज्यादा समय देने लगता है। अपने मित्रों और जान-पहचान वालों को भी भोजन पर आमंत्रित करता है। बुजुर्ग अपनी डाइट में आयुर्वेदिक और हर्बल डाइट को भी जगह देते हैं।

दक्षिण पूर्व दिशा होती है बेहतर

वास्तु टिप्स: जानें किस दिशा में होना चाहिए डाइनिंग हॉल,और इसका क्या पड़ता है प्रभाव

जब व्यक्ति अपने घर में दक्षिण पूर्व दिशा की तरफ डाइनिंग हॉल में बैठकर भोजन करता हैं तो उसे भूख भी पूरी तरह लगती है और यहां खाया हुआ खाना अच्छी तरह से पचता है। व्यक्ति अपने खाने के समय को लेकर सजग रहता है। यदि हमने यही गतिविधि घर की दक्षिण दिशा के लिए तय कर दी तो मानसिक तौर पर सुख और संतुष्टि का भाव आता है, जो हमारे विकास में भी सहायक होता है।

पश्चिम से दक्षिण पश्चिम की तरफ भोजन करने से व्यक्तियों में कांटे-छुरी और चॉपस्टिक सही एटिकेट्स और टेबल मैनर्स को लेकर सजगता बनी रहती है। घर की पश्चिम दिशा में यदि हमने डाइनिंग हॉल बनाया है, तो यहां खाना खाने से पोषण की प्राप्ति होती है और खाने को लेकर सारी प्राथमिकताएं पूरी होती हैं।

घर या फ्लैट में यदि पश्चिम से उत्तर-पश्चिम की तरफ हमने डाइनिंग हॉल बनाया है, तो यह हमारे लिए अच्छा नहीं होता है। यहां भोजन करने से धीरे-धीरे सोच में नकारात्मक रवैये का विकास होने लगता है, जिससे हमारी कार्यशैली भी प्रभावित होने लगती है।

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