1. प्रवेश द्वार :
प्रवेश द्वार की ओर पैर करके नहीं सोना चाहिए। इससे लक्ष्मी का अपमान होता है। वहीं घर के दरवाजों के सामने कोई  अवरोध भी नहीं होना चाहिए। सीढ़ियां हमेशा उन्‍नति का प्रतीक हैं। ऐसे में सीढ़ी के नीचे बैठकर कोई भी कार्य न करें। इससे काम में बाधा पहुंचती है।
 
2. घर का मंदिर :
वास्तु के अनुसार पूजा स्थान ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। अगर आप किसी मुकदमे में फंसे हैं, तो कोर्ट केस की फाइल मंदिर में रखने से मुकद्दमा जीतने में सहायता मिलती है।
 
3. दीवारों पर तस्‍वीर :
स्वर्गवासी वृद्धों की तस्वीर हमेशा दक्षिण दिशा में ही लगानी चाहिए। घर में घड़ी के सैल पर विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि उसके धीरे होने से घड़ी भी धीरे चलेगी तो गृहस्वामी का भाग्य भी धीमे चलेगा।
 
वास्‍तु के अनुसार,इस तरह से सोने वाले पति-पत्‍नियों के बीच होती हैं तकरार
4. पलंग दीवार से दूर :
पलंग दीवार से मिलाकर न रखें। इससे पति-पत्नी में तकरार होती है। किसी भी भवन का तीन राहों पर होना अशुभ होता है। इस दोष के लिए चारों दीवारों पर दर्पण होना चाहिए।
 
5. बीमारी से बचने का उपाय :
अधिक समय से बीमार को दक्षिण-पश्चिम कोना में सुलाना चाहिए। ईशान कोने में शीतल जल रखने से व्यक्ति जल्दी स्वस्थ होता है।

6. शयन कक्ष :

जिस कमरे में आप सोते हैं, वहां कोई भारी वस्तु न रखें। इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा शयन कक्ष में गंदे व्यसन करने से आपकी तरक्की में बाधा आएगी।
 
7. कहां हो भगवान की तस्‍वीर :
घर के मुख्य द्वार पर काले घोड़े की नाल, दुर्गा यंत्र त्रिशक्ति अंदर व बाहर की ओर गणपति अथवा दक्षिण मुखी द्वार पर हनुमान जी की तस्वीर अथवा भैरव यंत्र लगाकर लाभ लिया जा सकता है।

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