नमस्कार मित्रों, जब भी किसी प्लॉट या स्थान का चुनाव करें तो यह ध्यान जरूर दें कि वह वास्तु अनुकूल हो। जीवन तनावरहित हो और सुख-समृद्धि का साथ भी हो, इसके लिए यह जरूरी है कि हम जहां रह रहे हैं, वह जगह वास्तु अनुकूल हो। आज के महंगाई के जमाने में यदि प्लॉट का चुनाव गलत हो गया, तो उसमें वास्तु अनुरूप निर्माण में बड़ी दिक्कतें आती हैं।

1. खराब वास्तु स्थिति वाले घर में रहने वालों का जीवन बड़ा कष्टमय होता है। ऐसे स्थान में भूखंड खरीदें, जिसकी उत्तर पूर्व दिशा में गहरे गड्ढे, तालाब, नदी इत्यादि हों। दक्षिण और पश्चिम में टीले और पहाडिय़ां हों, तो अच्छा है।

2. किसी ऐसे स्थान पर प्लॉट न लें, जहां ऐसे पेड़ हों जिनकी जड़ें दूर-दूर तक फैली हुई हों, जैसे— पीपल, बरगद, आम और इमली इत्यादि।

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3. ऐसी जगह भी कष्टकारक होती है, जहां से हाई टेंशन की लाइनें निकली हुई हों क्योंकि यहां से निकलने वाली इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगें काफी खतरनाक होती हैं, जो वहां रहने वालों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।

4. ऐसी किसी भी जगह प्लॉट का चयन न किया जाए जहां गंदा नाला बहता हो। ऐसी जगह पर आने वाली दुर्गंध भी रहनी वालों को कष्ट देती है।

5. वैसे तो सभी दिशाएं अच्छी हैं, पर यदि प्लॉट लेते समय दिशा चुनने का मौका मिले तो उत्तर या पूर्व मुखी प्लॉट लें। हालांकि काफी कुछ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि वहां आसपास की परिस्थितियां कैसी हैं। इसमें यदि किसी वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लें, तो बेहतर है। प्लॉट यदि वर्गाकार या आयताकार हो तो और भी अच्छा है। अनियमित आकार के भूखंड खरीदने से बचना चाहिए। ऐसे प्लॉट वास्तु के दृष्टि से बहुत कम ही शुभ होते हैं।

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6. ऐसा भूखंड लेना भी अच्छा नहीं होता, जिसमें दो या दो से अधिक रास्ते हों। यहां पर रहने वालों के जीवन में बाधाएं और उन्नति में रुकावटें आती रहती हैं। बहुत मेहनत, प्रयास करने के बाद कुछ लाभ मिलता है। यदि ऐसा कोई भूखंड है, जिसके चारों तरफ समानांतर रास्ते हों, तो यह बड़ा शुभ होता है। स्वास्थ्य, आर्थिक और प्रसिद्धि के ख्याल से भी यहां प्राप्तियां बनी रहती हैं।

7. उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ सड़क होना भी शुभ होता है। व्यापारियों के लिए दक्षिण और पश्चिम की तरफ सड़क होना शुभ होता है। कई बार भूखंड चौराहों पर होते हैं। यहां भूखंड कटे या गोल होते हैं। यदि भूखंड के आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य कोण कटे या गोल हों तो उतनी परेशानी नहीं होती, जितनी ईशान कोण के कटे या गोल होने से होती है। विभिन्न दिशाओं में प्लॉट्स के बढऩे-घटने से उनके प्रभाव में कमी आती है, जिसके ठीक करके वास्तु अनुरूप बनाया जा सकता है।

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