विवि प्रशासन ने कहा फर्जी, तो साहित्यकार की तीसरी पत्नी और विधवा कहां से सामने आई

मिला है मीरा स्मृति पुरस्कार, भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से नवलेखन पुरस्कार से भी हैं सम्मानित

vikash.gupta@inext.co.in

ALLAHABAD: इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. आरएल हांगलू के मोबाइल नम्बर से महिला के साथ हुई अश्लील चैटिंग का वायरल स्क्रीन शॉट और इसके बाद वायरल आडियो टेप किसी सस्पेंश मूवी से कम नहीं है. इसमें पूर्व छात्रनेता अविनाश दुबे स्क्रीन शॉट और आडियो टेप को वायरल करता है. इविवि प्रशासन को पूर्व छात्रनेता पर मुकदमा दर्ज करवाने में 42 घंटे लगते हैं. छात्रनेता के दावों के मुताबिक अश्लील चैटिंग के केन्द्र में एक महिला है. लेकिन विवि प्रशासन कहता है ऐसी कोई महिला है ही नहीं. बावजूद इसके कहानी तब और उलझ जाती है, जब स्क्रीन शॉट और टेप में बताई जा रही महिला बाहर आ जाती है और विवि के दावे के मुताबिक यह कहकर सस्पेंश बढ़ा देती है कि जब वह कहीं फ्रेम में नहीं है तो विवि प्रशासन उससे बार-बार कांटैक्ट क्यों कर रहा है? उसके मुताबिक विवि को एक्शन लेने से पहले उसका कन्फर्मेशन क्यों लेना पड़ गया?

इलाहाबाद मायका, दिल्ली में ससुराल

अब सवाल है कि जो महिला फ्रेम में न होकर भी कहीं न कहीं है. वह आखिर है कौन? आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि यह कोई साधारण महिला नहीं बल्कि एक बड़े लेखक, कवि, उपन्यासकार और साहित्यकार के परिवार से ताल्लुक रखती है. हिन्दी का शायद ही कोई ऐसा विद्वान और विद्यार्थी होगा जो राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित महिला के पति और उसके ससुर के बारे में न जानता हो. जानकार कहते हैं कि जो इनके परिवार के बारे में नहीं जानता. उसके बारे में कह सकते हैं कि वह हिन्दी जगत का विद्यार्थी नहीं है. इस महिला का मायका इलाहाबाद स्थित मम्फोर्डगंज और ससुराल दिल्ली में है.

छह भाषाओं की जानकार

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह महिला अपने साहित्यकार पति की तीसरी पत्नी और विधवा है. इसकी खुद की भी कई किताबें चर्चित हुई हैं. यूं तो वह खुद को 50 वर्ष का बताती है. लेकिन उसे जानने वाले अपने अनुमान के आधार पर काफी कम उम्र का होने का दावा करते हैं. महिला खुद भी पोएट और राइटर है. उसने दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमफिल और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है. उसे इंग्लिश, हिन्दी, संस्कृत, जर्मन, फ्रेंच और उर्दू भाषा का ज्ञान है. अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर उसने खुद का धार्मिक विचार मानवता को बताया है. आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि उसे इलाहाबाद में मीरा फाउंडेशन एवं साहित्य भंडार की ओर से पिछले वर्ष एनसीजेडसीसी में हुए प्रोग्राम में मीरा स्मृति पुरस्कार से नवाजा जा चुका है. यही नहीं वह भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से नवलेखन पुरस्कार से भी सम्मानित है. महिला के पति का प्रकाशन समूह काफी हाऊस के पास बंद पड़ा है. जानकार बताते हैं कि उसके पास धन संपदा की कोई कमी नहीं है. विदेशों में उसका आना जाना भी लगा रहता है.