-प्रशासन करता है सुरक्षित सड़क देने का वादा

-गड्ढों के कारण रोजाना पब्लिक हो रही घायल

-आजादी को बीत गए 71 साल आखिर कब मिलेगी गड्ढों से आजादी

GORAKHPUR: सरकार ने 15 जून 2017 को ही सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का वादा किया था. इस वादे को पूरा करने का दावा भी एक साल पुराना हो चुका है. लेकिन शहर की सड़कें आज भी खस्ताहाल हैं. सड़कों का हाल यह है कि सिटी सेंटर में भी राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. नगर निगम और पीडब्लूडी दोनों सड़कें इस तरह से बनाती हैं बरसात का एक मौसम उनके लिए काफी होता है. बरसात के बाद से ही शहर के ज्यादातर सड़कों से बजरी उखड़ गई जिसके कारण कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं. शहर की मेन सड़क, वार्डो और हाईवे की सड़कों में से शायद ही कोई एक किमी की ऐसी सड़क बची हो जिसमें गड्ढे न हों. बल्कि कस्बों में जाने पर ऐसा लगता है मानों गड्ढों में ही सड़क बना दी गई है.

रोजाना हो रहे 8-10 एक्सीडेंट

सड़कों में गड्ढे होने के कारण रोजाना शहर में दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिसमें लोग घायल तो हो ही रहे हैं. इसके अलावा कई लोगों की मौत होने की भी सूचनाएं आ रही हैं. नेशनल हाईवे पर अक्सर ही सड़क दुर्घटनाएं हो जा रही हैं. गड्ढों के कारण कई लोग खुद ही गिर जाते हैं. खराब सड़कों के कारण रोजाना 8 से 10 सड़क एक्सीडेंट हो रहे हैं जिसमें बड़ी तादाद में लोग घायल हो रहे हैं. यह घटनाएं उन जगहों पर होती है जहां पर सड़कों की हालत खराब है. जहां सड़कें दुरुस्त हैं वहां पर दुर्घटनाओं की संख्या बेहद कम है. यानि यह साफ है कि यदि गड्ढा मुक्त सड़कों का इंतजाम प्रशासन कर सके तो बड़ी संख्या में हो रही दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है.

कब मिलेगी गड्ढों से आजादी?

देश को आजाद हुए 71 सालों का समय बीत चुका है, इस दौरान काफी उपलब्धियों को हासिल कर लिया गया है. यहां तक कि सड़क बनाने की कई नई तकनीक भी डेवलप हो चुकी हैं, कई नई मशीनों का भी अविष्कार हो चुका है. दूसरी तरफ सच यह भी है कि इसी दौरान लाखों लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हो चुकी है. देश को अंग्रेजों से आजादी मिलने में 200 साल लगे थे, लेकिन सड़कों की हालत देखकर लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या गड्ढों से आजादी मिलने में भी इतना ही समय लगेगा. आखिर क्यों नहीं एक मुश्त रकम खर्च कर बेहतर प्लान के साथ अच्छी सड़कें बना दी जांए, जिससे कम से कम राह चलते लोग मौत का शिकार न हों.

पैचअप के नाम पर रोड़ा और मिट्टी

बरसात का मौसम आने से पहले तो नगर निगम या पीडब्लूडी सड़कों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता तो नहीं बरतते हैं. लेकिन पहली बारिश के बाद से ही बदहाल सड़कों पर तात्कालिक राहत के नाम पर रोड़ा और मिट्टी गिरा दिया जाता है. तारकोल नहीं होने कारण पत्थर तो वैसे ही छिटक जाते हैं जबकि मिट्टी बारिश में बह जाती है. बरसात के मौसम में तीन महीने के दौरान ही कई सड़कें ऐसी हैं जहां पर पैचअप के नाम पर तीन से चार बार मिट्टी और पत्थर गिरा दिया जाता है.

हल्की बारिश में ही उखड़ गई बजरी

शहर की सड़कों पर लगी बजरी इस समय उखड़ गई है. जिसके कारण बाइकर्स फिसलकर गिर कर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं. हल्की बूंदाबांदी ने ही पीडब्लूडी और नगर निगम के बेहतर सड़कों के दावे को बेपर्दा कर दिया है. नेशनल हाईवे से लेकर नगर निगम के वार्डो के सड़कों की स्थिति एक सी हो गई है. इनमें से कई ऐसी सड़कें भी हैं जिनकी मरम्मत इसी साल कराई भी गई है. बारिश के कारण जो गड्ढे हुए हैं उनकी तो फिलहाल गिनती करना मुश्किल है. नगर निगम और पीडब्लूडी दोनों का ही दावा है कि वह सड़कों की मरम्मत करते रहते हैं, जाहिर सा सवाल उठता है कि आखिर मरम्मत के नाम पर क्या किया जाता है.

वर्जन-

नगर निगम की जिन सड़कों से बजरी उखड़ने की समस्या आ रही है. उन्हें जल्द ही जांच करवाकर ठीक कर लिया जाएगा. पब्लिक की सुविधा का ख्याल रखा जाएगा.

सुरेश चंद, चीफ इंजीनियर, नगर निगम

हल्की बारिश में बजरी उखड़ने की समस्या अक्सर सामने आ जाती है. ऐसी जगहों को चिन्हित कर मौसम ठीक होते ही उनकी मरम्मत कर दी जाती है.

रामजीत प्रसाद, एक्सईएन, पीडब्लूडी