- पिछले चार वर्षो में पर्यटकों की संख्या में हुआ है इजाफा

- दो निगमों के घाटे में भी आ रही लगातार गिरावट, फिर भी ठेके में दिए जा रहे हैं पर्यटक आवास गृह

>DEHRADUN: राज्य में पर्यटकों की आमद में हर वर्ष इजाफा हो रहा है. पर्यटन की रीढ़ कहे जाने वाले सरकारी पर्यटक आवास गृहों में हो रहे घाटे की खाई भी पट रही है. बावजूद इसके पर्यटन को ठेके पर दिया जा रहा है. आपको पढ़ने में यह अजीब लग रहा होगा लेकिन, यह सच्चाई है. दरअसल, सरकार की आंकड़ेबाजी पर विश्वास करें तो गत 4 वर्षो में राज्य में पहुंचने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है. दावा भी किया जा रहा है कि सरकार के गढ़वाल मंडल विकास निगमम(जीएमवीएन)व कुमाऊं मंडल विकास निगमम(केएमवीएनन) में लगातार हो रहे घाटे में भी सुधार हो रहा है. बावजूद इसके सरकार ने जीएमवीएन के कई सरकारी बंगलों को ठेके पर देने की शुरुआत कर दी है. दोनों निगमों के 14 बंगलों को ठेके पर दे दिया गया है. जबकि इसी माह हाल में जीएमवीएन के 21 बंगलों के लिए भी बोलियां लगी हैं. बाकी बंगलों की को ठेके पर देने की प्रक्रिया जारी है.

13 डिस्ट्रिक्ट, 13 डेस्टीनेशन

बजट सत्र के दूसरे दिन ट्यूजडे को विधायक सुरेंद्र सिंह जीना द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने लिखित में दिया. जवाब में कहा गया है कि उत्तराखंड में पर्यटन की दृष्टि से छूटे ऐसे रमणीय स्थलों पर भी आधारभूत सुविधाओं का विकास कर पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए 13 जनपदों में एक-एक नए पर्यटक स्थल को विकसित किए जाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है. 2015 में राज्य में देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या 2.94 करोड़ थी, तीन सालों में यह 3.68 करोड़ के पार पहुंच गयी है. विधायक ने केएमवीएन व जीएमवीएन के टीआरएच की लाभ-हानि की स्थिति भी जानी. बदले में लिखित जवाब मिला कि दोनों निगमों के आय-व्यय व लाभ-हानि में लगातार सुधार हो रहा है. पर्यटन मंत्री ने कहा कि दोनों निगमों के पास कोई ऐसा आवास गृह नहीं है. जिसका संचालन वर्तमान में नहीं किया जा रहा हो. कहा गया है कि जीएमवीएन द्वारा नुकसान में चल रहे 8 टीआरएच व केएमवीएन ने 6 टीआरएच को निजी संचालकों को संचालन के लिए दे दिया है. बाकी बंगलों, पर्यटक सुविधा केंद्रों को पीपीपी मोड पर दिए जाने पर समय-समय पर आवश्यकतानुसार विचार किया जाएगा.

::पर्यटकों की संख्या साल-दर-साल::

वर्ष--देशी---विदेशी--कुल (योग लाख में)

2015-292.95--1.11--294.06

2016--316.64--1.13--317.77

2017--345.81--1.42--347.23

2018--366.98--1.55--368.53

गढ़वाल मंडल विकास निगम आयय/व्यय

वर्ष----आय----व्यय----लाभा/हानि

2013-14--3135.52--4060.04 -924.52

2014-15--2580.29--3746.17 -1165.88

2015-16--3714.12--4050.46 -336.34

2016-17--3849.15--4110.61 -261.46

2017-18--4823.46--4693.57 -129.89

2018-19--4423.63--3635.30 -788.33फ्(दिसंबर 2018 तक)

::कुमाऊं मंडल विकास निगम आय/व्यय::

वर्ष----आय----व्यय----लाभ/हानि

2013-14--1160.28--1411.23 -250.95

2014-15--1691.50--1736.93 -45.43

2015-16--2150.12--2449.03 -298.91

2016-17--2233.53--2457.79 -224.25

2017-18--2418.30--2599.21 -180.90

2018-19--1880.06 -152.82(दिसंबर 2018 तक)

सूचना केंद्रों पर कब्जा नहीं

भाजपा विधायक खजान दास ने अपने सवाल में जानना चाहा कि पर्यटन सूचना केंद्रों को अवैध कब्जों से मुक्त कर पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा. जवाब में सरकार ने बताया कि सभी सूचना केंद्र पर कब्जे नहीं हैं. निगमों द्वारा केंद्रों को पीपीपी मोड पर संचालित किए जाने की प्रक्रिया गतिमान है. इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल पाएगा.

जॉर्ज एवरेस्ट 23 करोड़ से होगा विकसित

विधायक गणेश जोशी के सवाल के जवाब में पर्यटन मंत्री ने कहा कि मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट हाउस को डेवलप किए जाने के लिए वित्तीय वर्ष 2018-19 में एडीबी सहायतित आईडीआईपीटी के तहत योजना स्वीकृत है. एवरेस्ट के विकास के लिए 2371.89 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है.

वैष्णोदेवी जैसी पैदल पथ सुविधा नहीं

पर्यटन मंत्री ने विधायक प्रीतम सिंह पंवार के सवाल के जवाब में उत्तर दिया कि यमुनोत्री, केदारनाथ व हेमकुंड में पैदल पथ व अवस्थापना सुविधाओं को वैष्णोदेवी की तर्ज पर किए जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है.