विताली चुरकिन ने सुरक्षा परिषद की एक बैठक को बताया कि यानुकोविच ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को रविवार को इस संबंध में एक ख़त लिखा था.

इस बीच यूक्रेन के क्रीमिया प्रांत में हज़ारों  रूसी सैनिक जमा हो रहे हैं.

रूस वहां इस दख़लअंदाज़ी को न्यायसंगत बताने की कोशिश कर रहा है लेकिन उसके इस क़दम के बाद अमरीका और यूरोपीय संघ ने आर्थिक प्रतिबंधों की धमकी दी है.

वहीं  पश्चिमी देशों के राजदूतों ने रूस की इन कोशिशों को ख़ारिज कर दिया है.

अस्थिरता का माहौल

पिछले महीने विक्टर यानुकोविच को अपदस्थ किए जाने के बाद से क्रीमिया और पूर्वी यूक्रेन के कई रूसी भाषी शहरों में अस्थिरता का माहौल है.

सोमवार को डोनेट्स्क और  क्रीमिया के शहर ओडेसा में रूस-समर्थकों ने सरकारी इमारतों पर धावा बोलने के प्रयास किए. रूसी सैन्य बल और रूस-समर्थक मिलिशिया ने क्रीमिया में यूक्रेन की सैन्य छावनियों की कथित नाकाबंदी जारी रखी.

इस बीच यूक्रेन के रक्षा सूत्रों ने आरोप लगाया है कि रूस के ब्लैक सी बेड़े के प्रमुख अलेक्सांडर विटको ने मंगलवार सुबह तक आत्मसमर्पण नहीं करने की सूरत में  हमला करने की धमकी दी है.

हालांकि बाद में एक रूसी प्रवक्ता के हवाले से कहा गया कि ऐसा कोई अल्टीमेटम नहीं दिया गया था.

"रूस का सैन्य बलों को जमा करना एक काल्पनिक ख़तरे पर प्रतिक्रिया है."

-सामंथा पावर, संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी दूत

रूस का दावा,यानुकोविच ने मांगी थी सैन्य मदद

आरोप

उधर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में रूसी दूत विताली चुरकिन ने सुरक्षा परिषद को यानुकोविच के ख़त की प्रतिलिपि देने की पेशकश की.

उन्होंने कहा कि अपदस्थ राष्ट्रपति के मुताबिक़ यूक्रेन गृह युद्ध की कगार पर है और नागरिकों को सिर्फ़ रूसी भाषा बोलने के लिए परेशान किया जा रहा है.

रूस ने यूक्रेन की नई सरकार को मान्यता नहीं दी है और अब भी विक्टर यानुकोविच को ही वैध राष्ट्रपति मानता है.

लेकिन पश्चिमी देशों ने रूस पर अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया है.

अमरीकी दूत सामंथा पावर ने कहा, "रूस का सैन्य बलों को जमा करना एक काल्पनिक ख़तरे पर प्रतिक्रिया है. सैन्य कार्यवाई उन ख़तरों के आधार पर नहीं की जा सकती जो हैं ही नहीं."

कई पश्चिमी देशों ने रूस से आग्रह किया है कि वो यूक्रेन से अपने सुरक्षाबल हटा ले और वहां अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को आने दे.

अमरीका और यूरोपीय संघ ने रूस पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है. इसमें वहां सफ़र करने पर संभावित प्रतिबंध और आर्थिक क़दम शामिल हैं.

लेकिन एक तस्वीर में एक ब्रितानी अधिकारी ऐसे दस्तावेज़ों के साथ दिख रहे हैं जिससे लगता है कि ब्रिटेन रूस के साथ व्यापार सीमित नहीं करेगा.

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