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AGRA :बाह के बटेश्वर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक निवास का ऊंचा टीला उनके बुलन्द इरादे को दर्शाता है. जिस घर में भारत रत्न का बचपन बीता, भले ही बाढ़ और देखरेख नहीं होने से अब ऊंचा टीला बन गया हो, लेकिन उनके पैतृक गांव में आज भी उनके बचपन की यादें झरोखों में झांकती नजर आती हैं.

गांव में आती थी बाढ़
पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के पैतृक गांव बटेश्वर में बाढ़ आती थी. उस बाढ़ में कच्चा मकान गिर गया. उनके पारिवारिक भतीजे अश्वनी वाजपेयी ने बताया कि अटलजी के पिताजी कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर की शिन्दे छावनी में शिक्षक की नौकरी करते थे. बाढ़ आने पर वे गांव को छोड़कर ग्वालियर में चले गए. इस दौरान उनकी प्रारंम्भिक शिक्षा बटेश्वर में ही हुई. उनके बचपन के कई सखा थे. इसके बाद भी उनके पिताजी और माताजी गांव आते रहे.

विद्यार्थी जीवन से जुड़ गए संघ से
वह अपने छात्र जीवन से ही आरएसएस से जुड़ गए. देश सेवा के लिए समर्पित अटल ने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से बीए करने के बाद कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति शास्त्र में एमएम किया. पिता पं. कृष्ण बिहारी वाजपेयी के साथ लॉ की पढ़ाई शुरू की, लेकिन उसे बीच में छोड़ दिया. और आरएसएस से जुड़ गए. उन्होंने देश सेवा के लिए स्वयं का विवाह नहीं किया. उन्होंने पं. दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में राजनीति का ककहरा सीखा. उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की. सन् 1968 से 73 तक राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे. 1955 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. 1957 में उन्हें जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में बलरामपुर से चुनाव लड़ा और विजयी हुए. एक कुशल राजनीतिज्ञ रूप में पहचान बनाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी पत्रकार होने के साथ कवि भी थे. उन्होंने पांचजन्य, राष्ट्रधर्म, वीर अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया.

मंदिर आज भी मौजूद
बाढ़ में उनका कच्चा मकान ध्वस्त हो गया. मकान के लिए घुमावदार रास्ता था. गर्मियों की छुट्टियों में वे गांव आया करते थे. जहां परिवार पूजा करता था. वो मन्दिर आज भी मौजूद है. अटलजी के भांजे की बहू गंगा देवी ने बताया कि जब वाजपेयी आए थे तो रातोंरात सीसी खरंजा तैयार हुआ था. रोड भी बन गई थी. वे घर पर बैठे थे. उनके मिलने वालों की भीड़ लग गई थी. सुरक्षा गार्डो ने पूरे घर को घेर लिया था.

अंतिम बार आगरा 2005 में आए थे
वैसे तो अटल बिहारी वाजपेयी का आगरा से गहरा नाता था. वे कई बार आगरा आए थे. लेकिन पैतृक बार वर्ष 2005 में आए थे, जब वे प्रधानमंत्री नहीं थे. बता दें कि उनकी बहन कमला दीक्षित जयपुर हाउस के अलकापुरी में रहती थीं. भांजे अजय दीक्षित की डैथ हो गई थी. सन् 1988 में जब अटल जी आगरा आए थे, तो उनका स्वागत फूलों से किया गया था, तब उन्होंने टिप्पणी की थी कि आगरा के लोग तो फूलों से घायल कर देते हैं.