टीकाकरण के दौरान बच्चों की मौत का फेक वीडियो हो रहा वायरल

स्वास्थ्य विभाग ने जारी की गाइडलाइन, लोगों से की अपील

MEERUT। मीजल्स रूबेला टीकाकरण के दौरान 3 बच्चों की मौत हो जाने के एक वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग में खलबली मचा दी है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने इसे पूरी तरह से भ्रामक और फेक बताया है। लोगों से अपील भी की है एमआर वैक्सीनेशन पूरी तरह से सेफ है और इस तरह की भ्रामक सामग्री पर कतई ध्यान न दें।

साल 2010 का वीडियो

सोशल मीडिया पर निजी चैनल की वायरल वीडियो पर एनएचएम रुटीन न इम्यूनाइजेशन जनरल मैनेजर डॉ। वेदप्रकाश ने सभी जिलों के जिला प्रतिरक्षण अधिकारियों को निर्देश दिए है। उन्होंने कहकि यह वीडियो साल 2010 का है। कुछ शरारती तत्व इसे अब वायरल करके भाम्रक स्थिति पैदा कर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने सभी डीआईओ को निर्देश दिए हैं कि स्वास्थ्य विभाग की टीम को अगर भ्रामक और फेक सामग्री मिलती है तो वह किसी भी तरह से इसे आगे प्रेषित नहीं करेंगे। अगर कोई ऐसा करता पाया गया तो उसे दोषी माना जाएगा।

ये है गाइडलाइन

स्कूलों और अन्य केंद्रों में खाली पेट बच्चों का टीकाकरण नहीं होगा।

टीकाकरण अभियान के दौरान 108 एंबुलेंस सेवा को अलर्ट मोड पर रखा जाएगा

टीकाकरण के दौरान अगर किसी बच्चे की तबियत बिगड़ती है तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाया जाएगा।

टीकाकरण के दौरान बच्चों के रिएक्शन को समझने के लिए प्रतिरक्षण टीम को प्रशिक्षित किया जाए।

टीकाकरण अलग कमरे में होगा और टीकाकरण के आधे घंटे तक बच्चों को कमरे में रोका जाएगा ताकि बच्चों के रिएक्शन पर निगरानी रखी जाए ।

स्वास्थ्य विभाग की टीम को अपने पास प्राथमिक एलर्जिक उपचार किट एनाफैलेक्सिस किट की व्यवस्था भी करनी होगी।

बीमारी है संक्रामक

मीजल्स रुबेला वायरल बीमारी है। गर्भवती महिला से इस विषाणु की लपेट में आ जाएं तो नवजात बच्चों में कई तरह की अपंगता पैदा होने का खतरा बना रहता है। रुबेला गर्भपात, जन्म-मौत और गंभीर जन्मजात बीमारियों सहित बच्चों में बहरापन और नेत्रहीनता का कारण भी बन सकता है।

मीजल्स रूबेला टीका पूरी तरह से सुरक्षित है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो कई साल पुरानी है। लोगों से अपील है कि वह अपने बच्चों को एमआर टीकाकरण जरूर करवाएं

डॉ.विश्वास चौधरी, डीआईओ, स्वास्थ्य विभाग

मीजल्स रूबेला के टीकाकरण बच्चों के लिए बहुत जरूरी है। इस टीकाकरण से बच्चों में किसी प्रकार की कोई परेशानी या मौत नहीं होती है। सुई के डर से छोटे बच्चों में घबराहट हो सकती है।

डॉ। पीके जैन, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल