पानी की सप्लाई कम होने से हो रही पेयजल की किल्लत

प्रशासन से इंतजाम नाकाफी, जगह-जगह हो रही पानी की कमी

Meerut. जल है तो जीवन है, लेकिन गिरते भूगर्भ जल स्तर और पानी की कमी के चलते लोगों के जीवन पर संकट गहरा गया है. इस संकट से लोगों को उबारने के लिए प्रशासन के इंतजाम न केवल नाकाफी हैं बल्कि पानी की किल्लत को दूर करने के लिए प्रशासन पूरी तरह से लापरवाह भी बना हुआ है. शहर में हर रोज लाखों लीटर पीने योग्य पानी बहकर बर्बाद हो जा रहा है जबकि नगर निगम, जल विभाग समेत तमाम विभाग आंख मूंदकर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, जबकि आम लोगों को हर रोजाना पानी की परेशानी से जूझना पड़ता है.

यह है स्थिति

मेरठ में पानी की स्थिति का हाल बहुत अच्छा नहीं है. डिमांड से ज्यादा आपूर्ति होने के बावजूद भी लोगों को पानी की समस्या से जूझना पड़ता है. गौरतलब है कि रोजाना 230 एमएलडी पानी की जरूरत पर विभाग 260 एमएलडी पानी की आपूर्ति कर रहा है लेकिन हर रोज करीब 100 एमएलडी पानी पाइपों में ही लीक हो जाता है. जबकि प्रति व्यक्ति 155.2 लीटर पानी की जरूरत है. व्यवस्था में हुए सुराखों की वजह से आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है.

ये है स्थिति

167 ट्यूबवेल

9000 हैंडपंप

6 लाख समर्सिबल

16वें घर में समर्सिबल

90 हजार तकरीबन नलकूप

94 लाख लीटर पानी बहता है

543 गैराज हैं, जिनमें 6 हजार गाडि़यों की धुलाई होती है.

65 हजार गाडि़यां घरों में धोने की लिस्ट नगर निगम के पास बन चुकी है.

12 ब्लाकों में से 9 ब्लाक डार्क जोन घोषित हो चुके हैं.

2 लाख 75 हजार लोग पानी का टैक्स देने के लिए चिंहित हैं

1 लाख 90 हजार लोग ही टैक्स देते हैं.

लाखों लीटर पानी हो रहा बर्बाद

शहर की सड़कों, नाले-नालियों के अलावा विभागों की व्यवस्था में होने वाले सुराख की वजह से रोजाना लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है. स्थिति यह है कि प्यारेलाल शर्मा से थापर नगर इलाके तक ही सैकड़ों लीकेज प्वाइंट हैं, जिनको विभाग की ओर से ठीक नहीं कराया गया है इसके अलावा भोले की झाल से मेरठ तक पानी सप्लाई करनी वाली लाइन में भी कई जगह लीकेज हैं, जिसकी वजह से लोगों तक पहुंचने से पहले ही कई एमएलडी पानी वेस्ट हो जाता है. घरों और गैराजों में साफ पानी से धुलाई होती है जबकि रेलवे और रोडवेज पर धुलाई होने की वजह से भी पानी की वेस्टेज हाेती है.

पानी को तरसते लोग

बेहतर पानी व्यवस्था के दावों की पोल खोलते शहर में ऐसे कई इलाके हैं जहां लोग आजादी के 72 साल बाद भी साफ पानी के लिए तरसते हैं. इन इलाकों में लगे इक्का-दुक्का हैंडपंप ही यहां पानी सप्लाई का एकमात्र जरिया हैं, सैकड़ों मलिन बस्तियां, पुराने इलाके जैसे जाकिर कॉलोनी, समर गार्डन, जमुना नगर, कुरेशी नगर, सिद्धार्थ नगर, तेजगढ़ी, इमलियान, मच्छेरान, हुमायुं नगर, मलियाना, नई बस्ती, शकुर नगर आदि इलाकों की स्थिति बहुत बेहतर नहीं हैं.

रैपिड फायर इंटरव्यू

अली हसन कर्नी , अपर नगर आयुक्त,

सवाल- शहर में पानी की दिक्कत क्यों है.

हमारी तरफ से पानी की पूर्ति के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं.

सवाल- पानी की सप्लाई के लिए अभी कई इलाकों को इंतजार हैं.

कई इलाकों में हैंडपंप से सप्लाई की जा रही है. हम वहां सुविधाएं बढ़ाने के लिए योजनाओं पर काम कर रहे हैं.

सवाल- पीने का पानी घरों में उपलब्ध नहीं हो पा रहा है

भूगर्भ जल का स्तर धीरे धीरे कम हो रहा है. अधिकतर इलाकों में गंगाजल की आपूर्ति नहीं शुरु हो पाई है.

सवाल- गंगाजल योजना की लाइन बिछे हुए 4 साल हो चुके हैं लेकिन सप्लाई शुरु नहीं हुई है.

जवाब- भोले की झाल से जल आपूर्ति के लिए अभी लाइनें पूरी तरह से कनेक्ट नहीं हो पाई हैं. जिस कारण यह दिक्कत आ रही है.

सवाल- समर्सिबल से जल के दोहन को रोकने के लिए क्या तैयारी है.

जवाब- इसके लिए हम अभियान चलाएंगे. शहर में चल रहे अवैध समर्सिबल पर कार्रवाई की जाएगी.

पीने का पानी पूरी तरह से उपलब्ध नही हैं. कई बार हम लोगों को पानी के लिए जूझना पड़ता है.

हाजी इलियास

सड़कों पर पानी बहता रहता है, लेकिन लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ता है.

दीपक

पानी की बहुत ज्यादा समस्या है. निगम की सप्लाई का पानी घरों तक पहुंच ही नहीं पाता है.

अनिल