- फैजुल्लागंज के दाऊदनगर में बाढ़ जैसे हालात, 2000 से अधिक परिवार घरों में कैद लोग, बस नाव ही सहारा

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LUCKNOW

फैजुल्लागंज के दाऊद नगर में राजमिस्त्री राजू कश्यप ने कड़ी मेहनत करके एक छोटा सा आशियाना बनाया और एक-एक कर गृहस्थी का सामान जुटाया था. उसे उम्मीद नहीं थी कि एक ही झटके में उसके सारे सपने तार-तार हो जाएंगे और दो वक्त की रोटी के लिए उसे व उसके परिवार को संघर्ष करना पड़ेगा. उसके टूटे हुए सपनों की वजह बना बारिश के कारण इलाके में हुआ जलभराव. जिसकी वजह से राजू एक हफ्ते से काम पर नहीं जा पा रहा है. इससे खुद अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसके घर में चूल्हा कैसे जल रहा होगा. यह कहानी सिर्फ राजू की नहीं बल्कि उन सभी लोगों की है, जो दाऊदनगर में रहते हैं.

2 हजार से अधिक घर पानी में

नये व पुराने दाऊदनगर को घनी आबादी वाला एरिया माना जाता है. यहां करीब सात से आठ हजार घर बने हैं. वैसे तो स्थिति दोनों एरिया की खराब है लेकिन सबसे ज्यादा कोहराम पुराना दाऊदनगर में टूटा है. यहां मौजूद करीब दो से ढाई हजार मकान पानी-पानी हो चुके हैं.

घरों की चौखट तक डूबी

जलभराव की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शायद ही ऐसा कोई घर हो, जिसकी चौखट पानी में न डूबी हो. दस फीसदी घर ऐसे हैं, जहां अंदर तक पानी भर गया था. पिछले दो दिन से पानी जरूर उतरा है लेकिन लोगों को राहत नहीं मिली है. फिलहाल अगले एक सप्ताह तक राहत मिलने की उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है. लेकिन अगर इस बीच तेज बारिश हो गई तो स्थिति और खराब हो जाएगी.

एक नाव का सहारा

लोगों को राहत देने के लिए एक नाव लगा दी गई हो लेकिन इससे राहत मिलती नजर नहीं आ रही है. पानी में हजारों जिंदगियां डूबी हुई हैं, जिससे खुद अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक नाव से एक समय में कितने लोगों को मंजिल तक पहुंचाया जा सकता है. हैरानी की बात यह है कि नाव की स्थिति भी बेहतर नहीं है. उम्मीद जताई जा रही है कि शाम तक एक और नाव की व्यवस्था की जा सकती है.

700-800 लोगों को निकाला पानी से

लोगों के घरों में पानी भरा है. जिससे लोग दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी नहीं ले पा रहे हैं. नाव ही उनका सहारा बनी हैं. नाव चालक संतराम की माने तो वो गुरुवार शाम से शुक्रवार दोपहर तक करीब 700 से 800 लोगों को इधर-उधर से ले गया है. लोगों को राहत देने के लिए वह सुबह से रात आठ से नौ बजे तक नाव चला रहा है और किसी से पैसा भी नहीं ले रहा है.

घरेलू सामान बर्बाद

इलाके में कई घर ऐसे हैं जिनका बेस जमीन के बराबर है. ऐसे घरों के अंदर तक काफी पानी भर गया है. जिसके चलते इन घरों में रहने वाले लोगों को अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ी है.

स्कूल नहीं जा रहे बच्चे

जलभराव की वजह से कई बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. वहीं कई पैरेंट्स ऐसे हैं, जो जिंदगी दांव पर लगाकर भरे पानी को लांघकर बच्चों को स्कूल पहुंचा रहे हैं. ऐसे लोगों ने इस एरिया में अधिक नावें चलाने की मांग की है.

एंटी लार्वा का छिड़काव

इन इलाकों में संक्रामक बीमारियां न फैले, इसके लिए नगर मलेरिया इकाई की टीम ने एंटी लार्वा का छिड़काव शुरू कर दिया है. 25 लोगों की टीम में प्रशांत कुमार वर्मा, डॉ. केएन शुक्ला आदि शामिल हैं. साथ ही आपात स्थिति से निपटने के लिए मौके पर एक एंबुलेंस खड़ी की गई है.

दवाई को लेकर सवाल

इलाके में संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए दवाइयों का वितरण किया जा रहा है. हालांकि लोगों का आरोप है कि सभी को दवाइयां नहीं मिल रही हैं. लोगों ने मांग की है कि घर-घर जाकर दवाएं बांटी जाएं.

मेयर ने लिया हालचाल

शुक्रवार दोपहर मेयर संयुक्ता भाटिया व विधायक नीरज बोरा की पत्नी बिंदु बोरा दाऊद नगर पहुंचीं. दोनों नाव पर सवार होकर उन घरों में रहने वाले लोगों से मिलने पहुंचीं, जो पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं. इन लोगों ने प्रभावित लोगों में पूड़ी-सब्जी का वितरण भी किया. यहां लायंस क्लब की ओर से मुख्य मार्ग पर कैंप लगाकर पूड़ी आदि बांटी गई. विधायक नीरज बोरा ने भी पीडि़त लोगों के बीच जाकर उनका हालचाल जाना.

नगर निगम टीम नदारत

जहां जलभराव हुआ है, वह निगम क्षेत्र में हैं. हर साल यहां बाढ़ जैसे हालात होते हैं. इसके बाद भी समस्या को दूर करने के लिए कदम नहीं उठाए जाते. हैरानी की बात यह है कि मेयर को छोड़ निगम का कोई भी दूसरा अधिकारी मौके पर नहीं आया.

पूरा प्रयास है कि जलभराव से प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाई जाए. बंधे का चौड़ीकरण न होने से बाढ़ जैसे हालात हुए हैं. जल्द ही निगम अधिकारियों के साथ बैठक कर इस समस्या को दूर करने की रणनीति बनाई जाएगी.

संयुक्ता भाटिया, मेयर