क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : मॉनसून के दस्तक देने के बाद भी राजधानी के कई इलाकों में जल संकट बरकरार है. रातू, कांके, बरियातू, मेन रोड, धुर्वा, लालपुर, बहू बाजार, हिनू आदि इलाकों में पानी के लिए जहां हाहाकार मचा है, वहीं डोरंडा 'ड्राई-जोन' बना हुआ है. कचहरी और प्रोजेक्ट बिल्डिंग जैसी महत्वपूर्ण जगह में भी पेयजल का गंभीर संकट है. यहां हर साल पांच-सात फीट नीचे जल स्तर का नीचे जाना कोई नई बात नहीं है. अगर यही स्थिति बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब हम बूंद-बूंद पानी के लिए तरसेंगे.

विरासत में मिला है जल संकट

रांची में जल संकट कोई नई समस्या नहीं है. शहरी क्षेत्र में 200-400 मीटर के गहराई में भी कुछ जगहों पर पीने लायक पानी नहीं मिलता है. वाटर लेयर काफी नीचे होने, निगम से अनुमति एवं भौगोलिक जटिलता के कारण हर क्षेत्र में बोरिंग के माध्यम से साफ पानी नहीं मिलता है. ये स्थिति आज से नहीं है. लंबे समय से जारी है.

घरों तक नहीं पहुंच रहा पानी

नगर निगम में 55 वार्ड है. सभी इलाकों में पाइप के जरिए पानी की आपूर्ति की जानी है, लेकिन यह संभव नहीं हो का है. भौगोलिक स्थिति, ठोस प्लानिंग का अभाव व कर्मचारियों की कमी एक साथ फंड की उपलब्धता नहीं होने के कारण सभी वार्डो में पेय जल का पूरा नहीं हो पाया है. आज भी रांची में नगर निगम को पेय जल पहुंचाने के टैंकर का सहारा लेना पड़ रहा है.

हर मौसम में गिरता जा रहा है जल स्तर

जल विशेषज्ञों की मानें तो रांची और आस पास के इलाके में लगभग 10 मीटर नीचे जा चुका है. रांची यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ इन्वायरमेंट एण्ड वाटर मैनेजमेंट के व्याख्याता डॉ नीतीश प्रियदर्शी ने बताया कि पहले जहां मई जून में वाटर लेयर नीचे जाता था अब तो फरवरी मार्च में नीचे चला जा रहा है. इसके पीछे मुख्य कारण जल स्तर नीचे जा रहा है.