- पूरे प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के तहत आगरा में आई पहली मशीन

- 24 घंटे में मशीन से मिल सकेगा 100 लीटर तक पानी

आगरा. अब हवा से पानी बनेगा. यह पानी पीने योग्य शुद्ध होगा. प्रदेश में पहले पायलट प्रोजेक्ट के तहत नगर निगम में एडब्ल्यूजी (एटमोस्फियरिक वाटर जेनरेटर) मशीन लगाई गई है. ये मशीन हवा से पानी बनाएगी. अगर ये प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो बड़ेस्तर पर इसको स्थापित किया जाएगा. मंगलवार को पायलट प्रोजेक्ट के तहत नगर निगम में एडब्ल्यूजी मशीन लगा दी गई. ये मशीन 24 घंटे में 100 लीटर पानी बनाएगी.

बिना तामझाम के मिलेगा प्यूर वॉटर

शहर में पानी की किल्लत को देखते हुए स्मार्ट सिटी आगरा के नगर निगम में अभी पायलट प्रोजेक्ट के तहत मशीन लगाई गयी है. इस बारे में ऐजल मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी के मैनेंजर ऑपरेशन मृदुल सिंह ने बताया कि इस मशीन से पानी लेने के लिए किसी तामझाम की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. इस छोटी मशीन की लागत पांच लाख रुपये है. ये हवा में मैाजूद नमी का कलेक्ट कर ठंडा कर पानी बनाएगी. ये पानी डब्ल्यूएचओ के स्टै‌र्न्ड के अनुसार प्योर वाटर है. इसमें किसी ऑपरेटर की आवश्यकता नहीं है. न ही इसके लिए रॉ वाटर की आवश्यकता है. इसी तरह की बड़ी मशीन से 24 घंटे में 500 से 1000 लीटर तक पानी बनाया जा सकता है. इसमें दो बटन है, जिसमें ग्रीन बटन के पुश करने पर वाटर मिलने लगेगा. रेड बटन का पुश करने पर वाटर सप्लाई बंद हो जाएगी.

पहले दिन नगर आयुक्त ने पीकर देखा पानी

नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने एडब्ल्यूजी मशीन से निकले पानी को पीकर देखा. इस बारे में नगर आयुक्त ने बताया कि यह मशीन पूरे प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के तहत आगरा में लगाई गयी है. बता दें, आगरा में पानी की बहुत बड़ी किल्लत हैं. यमुना के रॉ वाटर को प्योर बनाने के लिए हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है. इस मशीन में रॉ वाटर की जरूरत नहीं है. इसके अलावा वाटर एटीएम पर भी ऑपरेटर की जरूरत पड़ती है. इसमें मशीन में ऑपरेटर की जरूरत नहीं. अगर ये पॉयलट प्रोजेक्ट सफल हुआ, तो बड़े पैमाने पर मशीन लगायी जाएगी.