40 मीटर तक भूजल पीने लायक नहीं बचा है जिले में

91 सेमी की दर से प्रतिवर्ष गिर रहा है भूजल स्तर

जिला प्रशासन ने विभिन्न विभागों से तलब की रिपोर्ट

Meerut. पानी के इंडस्ट्रियल यूज पर रोक की तैयारी जिला प्रशासन कर रहा है. डीएम अनिल ढींगरा के निर्देश पर एडीएम सिटी ने सभी विभागों को बल्क में यूज हो रहे ग्राउंड वाटर की विस्तृत जानकारी देने के निर्देश दिए हैं. मेरठ में आरओ प्लांट, पेपर मिल, लेदर इंडस्ट्री, शुगर मिल आदि में बल्क में ग्राउंड वाटर का इस्तेमाल हो रहा है. डीएम अनिल ढींगरा ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों में बल्क में ग्राउंड वाटर के यूज करने की शिकायतें मिल रही हैं. सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में ऐसे उद्योगों को चिह्नित करें, जिनमें बल्क में ग्राउंड वाटर यूज हो रहा है. जल्द ही प्रावधान तय करके ग्राउंड वाटर के औद्योगिक इस्तेमाल पर रोक लगाई जाएगी.

मेरठ में जल संकट

वर्ष 2010 से 2011 के बीच दोहित और अतिदोहित ब्लाकों की संख्या दस गुना से ज्यादा बढ़ गई. इधर, तालाबों के बंजर बनने से भूजल में तेजी से प्रदूषण बढ़ा. जिले में तमाम स्थानों पर 40 मीटर तक भूजल पीने लायक नहीं बचा है. शासन की रिपोर्ट बताती है कि मेरठ में प्रति वर्ष 91 सेमी की दर से भूजल गिर रहा है. इसी तरह से अतिदोहन होता रहा तो अगले दस वर्ष में रजपुरा ब्लाक (शहरक्षेत्र) के नीचे पानी खत्म हो गया.

औद्योगिक प्रयोग से स्थिति गंभीर

भूजल विभाग के मुताबिक अगर किसी क्षेत्र में पानी की निकासी की दर 70 फीसदी से ज्यादा है तो वहां भूजल संकट का खतरा पैदा हो सकता है. अगर इस पैमाने पर देखें तो मेरठ के 12 में से आठ ब्लाकों में खतरे की घंटी बज चुकी है. शहरक्षेत्र और उसके आसपास भूजल के औद्योगिक प्रयोग से जलस्तर लगातार गिर रहा है. वहीं दूसरी ओर तालाबों के सूखने एवं जौहड़ों के प्रदूषण की वजह से जमीन में समाने वाला पानी रसायन बन गया. मेरठ में आरओ प्लांट, पेपर मिल, सुगर मिल, कार वाशिंग प्लांट, स्लाटर हाउस में बल्क में ग्राउंड वाटर को यूज किया जा रहा है. संबंधित विभागों ने के पास न तो बल्क यूज का डाटा और न ही इन इंडस्ट्री की मॉनीटरिंग हो रही है.

देनी होगी रिपोर्ट

एडीएम सिटी मुकेश चंद्र ने भूजल विभाग समेत विभिन्न विभागों से ग्राउंड वाटर का बल्क यूज कर रहे इंडस्ट्री के बारे में विस्तृत जानकारी देने के निर्देश दिए हैं. पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, नगर निगम, जलकल विभाग, मेरठ विकास प्राधिकरण, जिला उद्योग केंद्र समेत विभिन्न विभागों को जिला प्रशासन ने निर्देश जारी कर औद्योगिक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी और बल्क में यूज हो रहे ग्राउंड वाटर की डिटेल देने के लिए कहा है. इसके साथ ही विभागों को यह भी बताना होगा कि औद्योगिक गतिविधियों में बल्क में ग्राउंड वाटर के इस्तेमाल की परमीशन किसने दी. क्या इंडस्ट्री यूजर चार्ज अदा कर रही है?

संकट में मेरठ का भूजल

ब्लाक क्षेत्रफल भूजल रिचार्ज-हे.प्रति मी वार्षिक भूजल दोहन जल उपलब्ध विकास दर

रजपुरा 18201 4971.5 5313 00 106 फीसदी

खरखौदा 19772 8103 8067 36 हे-मी 99.5

माछरा 21555 8610 7805 805 90

मेरठ 17010 3715 3422 292 92

परीक्षितगढ़ 27690 10526 9830 695 93

हस्तिनापुर 32612 14135 10, 958 3176 77

मवाना 26030 10806 8312 2493 76

दौराला 21488 7977 5594 2383 70

10 साल में भूजल की स्थिति

ब्लाक गिरावट

रजपुरा - 7.0

माछरा - 6.10

खरखौदा - 5.60

शहर क्षेत्र - 5.40

मेरठ - 4.10

नोट-सभी आंकड़े मीटर में हैं.