आई एक्सक्लूसिव

स्लग: डेली सुबह 4 बजे 8000 रुपए का गुब्बारा उड़ाता है मौसम विभाग

- गुब्बारा आसमान में उड़े इसके लिए भरी जाती है, हर दिन डेढ़ किलो हाइड्रोजन गैस

-महीने में लगभग 2.40 लाख रुपए पड़ता है खर्च

मौसम पूर्वानुमान में मिलती है मदद
भारत मौसम विज्ञान विभाग रांची केंद्र के डायरेक्टर बीके मंडल ने बताया कि केंद्र से जो गुब्बारा छोड़ा जाता है उससे 10 से 15 किमी के दायरे में आकाश में विंड स्पीड, आ‌र्द्रता, तापमान जैसे कारकों का पता चलता है. इस डाटा को विमान के पायलट को दिया जाता है. इसी डाटा के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान किया जाता है. इस तरह से यह मौसम को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

वेदर बैलून है गुब्बारे का नाम
केंद्र से जो गुब्बारा उड़ाया जाता है, उसका नाम वेदर बैलून है. यह एक हाई एल्टीट्यूड बैलून होता है. इसमें सेंसर और वैसे इंस्ट्रूमेंट लगे होते हैं जो रेडियोसोंडे के जरिए एटमोस्फेरिक प्रेशर, तापमान, आर्द्रता और विंड स्पीड की जानकारी केंद्र को राडार या रेडियो डायरेक्शन फाइंडिंग के जरिए भेजते हैं. इसमें रेडियो ट्रांसमिशन के लिए जो उपकरण लगाया जाता है, वो बैलून के निचले हिस्से में लगा होता है. वेदर बैलून 40 किमी की ऊंचाई तक पहुंचने में सक्षम होते हैं.

वर्जन
भारत मौसम विज्ञान विभाग के रांची केंद्र से मौसम की जानकारी लेने के लिए रोज सुबह एक गुब्बारा उड़ाया जाता है. इससे जो जानकारियां मिलती हैं, उसे पायलट को दिया जाता है. इसी के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान किया जाता है.
-बीके मंडल, डायरेक्टर भारत मौसम विज्ञान विभाग, रांची केंद्र