ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार 27 नक्षत्रों में आर्द्रा को जीवनदायी नक्षत्र माना गया है।आर्द्रा का शाब्दिक अर्थ गीला होता है। इस नक्षत्र से धरती में नमी होती है। इसी नक्षत्र से कृषि कार्य का श्रीगणेश होता है। भारत कृषि प्रधान देश है अतः 27 नक्षत्रों में अन्न-जल से युक्त इस नक्षत्र का विशेष महत्व है।ज्योतिष-विज्ञान के अनुसार सूर्य जब आर्द्रा में प्रवेश करता है तो धरती रजस्वला होती है,जो उत्तम वर्षा का प्रतीक है। इसी पवित्र समय में कामाख्या-तीर्थ में अबूवाची पर्व का आयोजन किया जाता है। यह नक्षत्र उत्तर दिशा का स्वामी है। आर्द्रा के प्रथम एवं चतुर्थ चरण का स्वामी वृहस्पति है तथा द्वितीय और तृतीय चरण का प्रतिनिधित्व शनि करता है।         

22 जून को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश होगा
इस वर्ष आर्द्रा का प्रवेश शनिवार-22 जून को रात्रि 12/58 पर हो रहा है,जो उत्तम वर्षा की सूचना है। आर्द्रा नक्षत्र के अधिपति भगवान शिव हैं,जो लोक कल्याणकारी देवता हैं। कृषि-कार्य हेतु इसे देव नक्षत्र माना गया है। यह पूर्णत:मिथुन राशि में संचरण करता है। इस वर्ष आर्द्रा के प्रवेश-काल के आधार पर ज्योतिषीय गणना के अनुसार अच्छी वर्षा का योग बन रहा है;कारण कि शनि वर्ष का अधिपति एवं आर्द्रा के दो चरणों का स्वामी भी है। शनिवार की रात्रि में आर्द्रा का प्रवेश उत्तम वर्षा की घोषणा है। इस नक्षत्र में ‘’हरि-हर’’अर्थात् भगवान शिव एवं विष्णु को खीर और आम का भोग लगाकर पूजा की जाती है।    

।।शुभमस्तु ।।

पंडित चक्रपाणी भट्ट

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