* 22 अप्रैल को होने वाली यह शादी बनी चर्चा का विषय
* खर्च से बचने के लिए नहीं करते शादी

गांधीनगर (एजेंसियां)।
जानकारी के मुताबिक पालघर के रहने वाले संजय धागडा रिक्शा चलाते हैं। 10 साल पहले उनकी मुलाकात बेबी से हुई। दोनों एक दूसरे से प्रेम करने लगे और बिना शादी के ही एक साथ रहने लगे। इसके बाद 2011 में संजय वापी की एक कंपनी में काम करने वाली और बचपन की दोस्त रीना से प्रेम करने लगा। संजय को शादी से पहले ही बेबी और रीना से तीन बच्चे हैं।

तीनों ने शादी करने का फैसला किया
बच्चे बड़े होने लगे तो तीनों ने शादी करने का फैसला किया। अब संजय 22 अप्रैल को पालघर के वासा सुतारपाड में बेबी और रीना के साथ शादी करने जा रहा है। दोनों युवतियों ने कहा कि हम इस शादी से खुश हैं। इस मामले में पुलिस का कहना है कि आदिवासी इलाकों में ऐसी शादियां होना आम बात  है। इनमें एक पुरुष से दो महिलाओं से शादी का रिवाज है।

खर्च से बचने के लिए नहीं  करते शादी

आदिवासी क्षेत्र धरमपुरा और कपराडा में होने वाले समूह विवाह में दूल्हा-दुल्हन अपने बच्चों को साथ लेकर कई बार शादी करते हैं इसका मुख्य कारण यह है कि पैसों का इंतजाम नहीं होने की वजह से कई बार लड़का और लड़की शादी किए बगैर ही पति-पत्नी के रूप में साथ रहने लगते हैं। पैसों की कमी के कारण कई बार लड़का व लड़की पक्ष शादी न करने का निर्णय ले लेते हैं। जब स्थिति सुधर जाती है तो समाज के सामने शादी कर लेते हैं।
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क्या कहना है दूल्हे का
मेरे तीनों बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल के रजिस्टर और दूसरे रिकॉर्ड में बच्चों का पिता वही है। लोग मेरे बच्चों को ताना न मारें इसलिए मैं एकसाथ दोनों से शादी कर रहा हूं।
संजय, दूल्हा

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