-महिला एवं बाल कल्याण विभाग के आदेश पर डिस्ट्रिक्ट में शुरू कराया गया सर्वे

-ऐसे बच्चों को जिला बाल संरक्षण इकाई चिह्नित करने के लिए जाएगी डोर-टू-डोर

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फैक्ट फाइल

128-राजकीय संप्रेक्षण गृह में बंद है बाल अपचारी

1000- से अधिक बाल अपचारियों पर लंबित है केस

75-बाल अपचारी इंटरमीडिएट पास कर लिए गए चिह्नित

12-वीं पास मांगी गई है योग्यता

18-वर्ष आयु पूरी करने वाले ही बाल अपचारियों की बनेगी सूची

1-माह में मांगी गई डिटेल

BAREILLY :

बाल अपचारी, गरीब बालक और बालिकाओं को सरकार रोजगार मुहैया कराएगी. इसके लिए महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने डिस्ट्रिक्ट बाल सरंक्षण इकाई से सर्वे शुरू करा दिया. विभाग ने डिप्टी सीपीओ से ऐसे सभी बच्चों की सूची एक माह के अंदर मांगी है. ताकि उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार जॉब मुहैया कराई जा सके.

फ्रेंकफिन कंपनी िदलाएगी जॉब

बाल कल्याण विभाग और फ्रेंकफिन इंस्टीट्यूट ऑफ एयर होस्टेस ट्रेनिंग कंपनी मुम्बई के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं. जिसमें यूपी के अपचारी, गरीब और लावारिस बच्चों और बच्चियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए उन्हें रोजगार मुहैया कराया जाएगा. फ्रेंकफिन इंटरमीडिएट पास बाल अपचारी बच्चे और बच्चियों को वरीयता दी जाएगी, उन्हें काउंसलिंग, ट्रेनिंग और उसके बाद जॉब देगा. ताकि जो बच्चे किसी तरह अपराध की ओर बढ़ चुके हैं वह दोबारा समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकें.

सौ से अधिक बाल अपचारी पा चुके हैं जॉब

महिला एवं बाल कल्याण विभाग की तरफ से यूपी के दो बैच बाल अपचारियों के फ्रेंकफिन कंपनी को भेज चुकी है. वह आज बेंगलुरु जैसे शहरों में ऑफिस और टेक्निकल सपोर्टिग आदि पदों पर जॉब भी कर रहे हैं. जिसमें पहले बैच में 50 बाल अपचारी और सेकंड बैच में 60 बाल अपचारी भेजे गए थे. रिजल्ट अच्छा मिलने पर इस योजना के लिए बरेली से भी अपचारियों की सूची तैयार कराई गई है.

ताकि वह दोबारा अपराध से बचे

महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने इसके लिए डिस्ट्रिक्ट में डिप्टी सीपीओ को एक पत्र भेजा है. जिसमें डिस्ट्रिक्ट के अपचारी किशोर और किशोरियां जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं और कम से कम इंटरमीडिएट पास हो उनकी सूची मांगी है. ताकि उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़कर रोजगार मुहैया कराया जा सके. जिससे वह अपनी जीविका के साथ विजी रहे और दोबारा अपराध की तरफ रूख न कर सके. मानना है कि इससे अपराध का ग्राफ भी गिरेगा और बेरोजगारी में भी कमी आएगी. इसके लिए रोजगार से पहले उनकी काउंसलिंग और ट्रेनिंग भी कराई जाएगी.

शिक्षित अपचारियों की संख्या में कमी

जिला बाल संरक्षण इकाई इसके लिए सर्वे शुरू कर दिया है. टीम ने बाल अपचारियों की लिस्ट जिला संप्रेक्षण गृह, सीडब्ल्यूसी, किशोर न्याय बोर्ड और पुलिस की मदद से हासिल कर ली है. लेकिन टीम जब डोर-टू-डोर सर्वे के लिए पहुंचती है तो पता चलता है कि वह पढ़े लिखे ही नहीं है, या फिर वह इंटरमीडिएट पास नहीं हैं. जिसके चलते अभी तक टीम को कुल 75 ही बाल अपचारी मिल सके हैं. फिलहाल टीम सर्वे में लगी हुई है.

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महिला एवं बाल कल्याण विभाग के आदेश पर बाल अपचारी, गरीब और स्ट्रीट चिल्ड्रेन की लिस्ट जिला बाल संरक्षण ईकाई की टीम तैयार कर रही है. इसके तहत अब अपचारी बालक और बालिकाओं को समाज की मुख्य धार से जोड़कर उन्हें सरकार रोजगार मुहैया कराएगी. सूची तैयार करने में पुलिस का भी सहयोग मांगा गया है.

नीता अहिरवार, डिप्टी सीपीओ, बरेली