शिद्दत से कर रहे थे मानसून का इंतजार, बौछार से आई बहार

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ALLAHABAD: गर्मी की तपिश से बेहाल होकर मानसून की बाट जो रहे शहर की बुधवार को बांछें खिल गई. झूम कर बरसे बदरा ने लोगों का तन-मन पुलकित कर दिया. मौसम विभाग पिछले कई दिनों से यूपी में भारी बारिश के संकेत दे रहा था. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश एरिया में ऐसा हुआ भी. लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश का अता पता नहीं था. लोग गर्मी और उमस से बेहाल थे. लोग हैरान थे कि आखिर राहत की बूंदे क्यों नहीं बरस रही हैं. बुधवार की भोर लोगों का यह इंतजार खत्म हुआ.

अब न रुकेगा सिलसिला

सूर्योदय से पहले शुरू हुई बारिश सुबह 11 बजे के बाद तक जारी रही. इससे मौसम खुशनुमा हो गया. हल्की बारिश और ठंडी हवाओं के झोकों ने लोगों को गर्मी से खासी राहत दी. हालांकि, सुबह की बारिश का खुमार दोपहर होते होते उतरता भी नजर आया. दोपहर दो बजे तक एक बार फिर तेज धूप देखने को मिली. इससे शाम ढलने तक दोबारा से उमस ने लोगों को परेशान किया. मौसम विशेषज्ञों का साफ कहना है कि बरसात अब रुकेगी नहीं. कुछ समय का ब्रेक लेकर दोबारा बारिश शुरू होना सुनिश्चित है.

अब तिरछी होंगी सूरज की किरणें

विशेषज्ञों का कहना है कि ढाई महीने तक मैदानी इलाकों में जोरदार गर्मी पड़ी है. ऐसे में अब जब मानसूनी हवाएं दस्तक दे चुकी हैं तो इन्हें पीछे ढकेल पाना संभव नहीं होगा. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में ज्योग्राफी डिपार्टमेंट के एक्स. एचओडी प्रोफेसर बीएन मिश्रा कहते हैं कि अच्छी मानसूनी बरसात के लिए जरूरी दोनों शाखाओं ने मध्य गंगा के मैदान में पैठ जमा ली है. ये शाखाएं अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से होकर आने वाली हैं. उन्होंने कहा कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाला चक्रवात सही समय पर एक्टिव हुआ है. जिसका जोर आने वाले समय में देखने को मिलेगा. प्रो. मिश्रा ने बताया कि सूरज का तेज भी अब धीरे धीरे कम होता जाएगा. क्योंकि 21 जून सूरज की किरणों के सीधे धरती तक पहुंचने का अंतिम दिन होता है. जिससे गर्मी भी ज्यादा लगती है. लेकिन इस तिथि के बाद सूरज की किरणें अब हौले हौले तिरक्षी होती जाएंगी.

खेतों में बरसा आसमान से सोना

वेडनसडे को हुई बरसात किसानों के लिए वरदान की तरह है. आम मान्यता है कि अगर पहली बारिश अच्छी हो तो मानो आसमान से सोना बरस रहा है. इससे धान की अच्छी फसल पैदा होना सुनिश्चित होगा. इसके अलावा खरीफ की सभी फसलों के लिए भी बरसात लाभकारी होगी. विशेषज्ञों का कहना है कि सावन और भादो तय करेंगे कि किसानों के लिए मानसून का सीजन कैसा रहा? इस दौरान अच्छी वर्षा होने से पैदावार भी अच्छी होगी. बता दें कि बीते दो वर्ष लगातार सूखे के ही रहे.