टेशन के समय तेजी से दिमाग करता है काम
चिंता करना ह्यूमन नेचर का स्‍वभाव होता है। जब हम सेल्‍फ अवेयर होते हैं तो हमें सोचने का स्‍तर बड़ता है। हमे फैमिली के प्रति जिम्‍मेदारी का एहसास होता है। जब हम किसी चीज की केयर करना शुरु कर देते है तब हमें यह समझ में आता है कि हम कुछ छोड़ रहे हैं। यह चिंता करने का ही परिणाम होता है। जब आप किसी की चिंता करते हैं तो इसका सीधा सा अर्थ है कि आप उसकी केयर भी करते हैं। रिसर्च में सामने आया कि हम जिन बातों की फिक्र करते हैं उसमें से 80 प्रतिशत चीजें कभी हमारे पास नही होती है। जब हम किसी बात की टेशन लेते हैं तो दिमाग को वो हिस्‍सा जिसे लिंबिक सिस्‍टम कहा जाता है काम करना शुरु कर देता है।

खतरनाक स्थिती से निपटते हैं स्‍ट्रेस हॉर्मोन्‍स

हम लाइफ में किसी भी तरह के प्रेशर को फील करते हैं उसे स्‍ट्रेस कहते हैं। स्‍ट्रेस हमारी बॉडी, दिमाग पर कई तरीकों से अस डालता है। स्‍ट्रेस के परिणाम बहुत समय के बाद नजर आते हैं जो सकारात्‍मक और नकारात्‍मक दोनो हो सकते हैं। बॉडी में स्‍ट्रेस हॉर्मोन्‍स का होना किसी खतरनाक स्थिती से निपटने के लिए जरूरी होता है। यहां बहुत से स्‍ट्रेस पॉ‍जटिव भी होते हैं। जैसे कि जब आप जॉब इंटरव्‍यू के लिए जाते हैं उस समय आप का स्‍ट्रेस आप को जॉब इंटरव्‍यू के लिए तैयार कर रहा होता है। वहीं कुछ स्‍ट्रेस बॉडी और दिमाग के लिए बहुत हानिकारक होते हैं जैसे जब आप किसी रिश्‍ते को खत्‍म करते हैं तो आप बहुत परेशान हो जाते हैं।

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