कानपुर। इंसान द्वारा तैयार किया गया सोवियत यूनियन का स्‍पेसक्राफ्ट 'लूना-2' दुनिया का पहला ऐसा स्‍पेसक्राफ्ट था, जो आज ही के दिन यानी कि 14 सितंबर, 1959 को चांद की जमीं पर उतरा था। चांद की जमीं पर उतरकर इसने दुनियाभर में तहलका मचा दिया था। रूस के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी। बीबीसी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, चाँद पर उतरने से पहले यह एयरक्राफ्ट करीब 36 घंटे तक उड़ता रहा था। 11500 मील प्रति घंटे की रफ्तार से सफर को तय करने के बाद लूना-2 चांद पर उतरते ही क्रैश हो गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चांद पर पहुंचने वाला यह स्‍पेसक्राफ्ट रूस का छठवां प्रयास था।

एक जैसे दिखते थे दोनों स्पेसक्राफ्ट
कहा जाता है कि शुरुआती प्रयासों के दौरान 3 स्‍पेसक्राफ्ट उड़ान भरने में नाकामयाब रहे थे। लूना-2 से पहले लूना 1 सिर्फ चांद के पास से गुजरने में सफल रहा था। बता दें कि चाँद पर क्रैश होने से पहले लूना-2 से वैज्ञानिकों को यह जानकारी मिली थी कि चांद पर चुंबकीय प्रभाव बिलकुल नहीं है और वहां सौर हवा भी मौजूद नहीं है। लूना-2 को कजाकिस्तान में स्थित 'बाइकोनूर कॉसमोड्रोम' नाम के स्पेसपोर्ट से रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया था। बता दें कि लूना 1 और लूना 2 बिलकुल एक जैसे दिखते थे लेकिन उनके कुछ फीचर एक दूसरे से बिलकुल अलग थे। उन्हीं कुछ फीचरों के चलते रूस को चाँद से जुड़ी अनोखी जानकारी हासिल करने में काफी मदद मिली।

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