विभागीय गलती का दंश झेल रहे अभ्यर्थी, हाई मेरिट के बाद भी नहीं मिला पसंदीदा जिला

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ALLAHABAD: शिक्षक भर्ती लिखित परीक्षा में गड़बडि़यों और चयन के नियमों में अचानक हुए बदलाव का खामियाजा अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है. हाई मेरिट के बाद भी उन्हें गृह जनपद या मनचाहा जनपद नहीं मिल सका. जबकि कम मेरिट हासिल करके बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को गृह जनपद आवंटित हो गया है. अभ्यर्थियों के साथ हुई गड़बड़ी की जांच को लेकर फिलहाल स्थिति साफ नहीं हो रही है. अभ्यर्थियों का कहना है कि इस प्रकरण की भी जांच होनी चाहिए. चयनित अभ्यर्थी आशीष शुक्ला का कहना है कि विभाग की गड़बड़ी के कारण अच्छे मा‌र्क्स मिलने के बाद भी उनको मनपसंद जिला नहीं मिला.

हाईकोर्ट की शरण में अभ्यर्थी

विभागीय गड़बड़ी की शिकार बनी सुल्तानपुर की शिखा सिंह का कहना है कि उनका गुणांक 64.10 और लिखित परीक्षा में 84 अंक मिलने के बाद उनकों सूची में 56वें अंक पर स्थित महाराजगंज जिला मिला है. काउंसलिंग आदि के समय जाने के लिए भी उन्हें कई तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ा है. महाराजगंज में जो स्कूल उनको आवंटित हुआ है. वहां से नेपाल बार्डर सिर्फ 30 किलोमीटर स्थित है. शिखा की तरह ही अन्य अभ्यर्थियों को भी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है. अभ्यर्थियों ने अब कोर्ट का सहारा लिया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में करीब 50 अभ्यर्थियों ने जिला आवंटन के लिए प्रयोग किए गए नियमों के खिलाफ याचिका दाखिल की है.

वर्जन

- जिला आवंटन की गड़बडि़यों का ही असर है कि इलाहाबाद के स्थान पर मुझे महाराजगंज डिस्ट्रिक्ट आवंटित हुआ है. जबकि मुझसे कम अंक पाने के बावजूद कई साथियों को इलाहाबाद या आस-पास के डिस्ट्रिक्ट आवंटित हुए हैं.

शिखा सिंह

- बेहतर अंक हासिल करने के बाद भी मनचाहा जिला आवंटित नहीं हुआ. इसमें विभागीय गड़बड़ी है. अभ्यर्थियों को जबरन परेशान किया जा रहा है. मेहनत करके अच्छे अंक हासिल करने का आखिर क्या फायदा, जब कम अंक वालों को मनपसंद जिला और अच्छे अंक वालों को इग्नोर किया जा रहा है.

छाया

- ओबीसी कैटेगरी और लिखित परीक्षा में 87 अंक व गुणांक 64.47 होने के बाद भी सूची में स्थित 27 जिला बलरामपुर आवंटित किया गया. कम अंक वालों को उनके मनपसंद का जिला आवंटित हुआ है.

वर्षा सचान