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BAREILLY: सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद स्टेशनरी की दुकानों पर बिक रहा व्हाइटनर-थिनर युवाओं और स्कूली बच्चों को नशे की गिरत में ले रहा है. कोर्ट की फटकार के बाद मैन्यूफैक्चरिंग कंपनीज ने व्हाइटनर-थिनर का मिक्सर तैयार कर हाई सिक्योरिटी पैकिंग में बिक्री का दावा किया था, लेकिन देखिए कैसे बरेली में एक युवक ने इस दावे की आई नेक्स्ट के कैमरे के सामने ही पोल खोल दी.

मानवता पर भारी लालच

पेपर पर राइटिंग मिस्टेक्स को मिटाने के नाम पर बिकने वाले व्हाइटनर-थिनर की बढ़ती बिक्री के पीछे असली वजह है इसका नशे में हो रहा यूज. स्टेशनरी की दुकानों पर चंद रुपए अधिक लेकर युवाओं और स्कूली बच्चों को यह खुलेआम बेचा जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद बरेली में इसकी बिक्री और नशे में इस्तेमाल के साक्ष्य आई नेक्स्ट के स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए. व्हाइटनर-थिनर को नशे में इस्तेमाल कर रहे एक युवक ने आई नेक्स्ट के कैमरे के सामने बताया कि वह एक दिन में दो से तीन-तीन टयूब नशे में इस्तेमाल करता है. स्टेशन रोड और नामचीन स्कूल्स के बाहर खुली स्टेशनरी शॉप वाले प्रिंट रेट पर 10 से 20 रुपए अधिक लेकर बिना कोई सवाल जवाब उसे यह नशा बेचते हैं. नशे की गिरत में वह अकेला नहीं शहर के सैकड़ाें बच्चे और युवा व्हाइटनर के थिनर से नशा कर रहे हैं. खुद नशे की गिरत में डूबे इस युवक ने दावा किया कि इस तरह का नशा करने वाले सैकड़ों किशोर व युवाओं को वह जानता है, अक्सर स्टेशरी शॉप पर उनसे मुलाकात होती है. स्कूली बच्चों, युवा और गरीबों को सस्ते नशे की लत तो उनके परिचित या नशेड़ी लगा देते हैं, लेकिन समाज चाहे तो इसे रोका जा सकता है. दुकानों पर चंद रुपयों के लालच में इसकी बेरोकटोक बिक्री मानवता को शर्मशार करने वाली है. आई नेक्स्ट के स्टिंग में युवक ने अपनी जेब से नामचीन कंपनी की थिनर टयूब निकाली और नशा किया. सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद व्हाइटनर-थिनर की ओपनेबल पैकिंग करना तो बंद कर निब वाली पैकिंग टयूब बाजार में उतार दी. कुछ कंपनीज ने तो पैकिंग में वाकई बदलाव कर दिया, लेकिन छोटे-मोटे बदलाव के साथ अभी भी कुछ नामचीन कंपनीज अभी भी खतरा बेच रही हैं.

सुलगते सवाल और नशेड़ी के बेखौफ जवाब

सवाल-कहां से लाते हो व्हाइटनर-थिनर?

जवाब-स्टेशनरी की दुकानवाला 10-20 रुपए एक्ट्रा लेकर दे देता है. थिनर की टयूब दिखाई.

सवाल-टयूब पर निब लगी है, कैसे निकलेगी?

जवाब-कंपनी वाले पागल बनाते हैं, ये लो निकल गई निब. दांत में दबाकर निब निकाल कर दिखाया.

सवाल-कब से नशा ले रहे हो?

जवाब-पहले पेट्रोल सूंघता था, उससे नशा कम होता था, अब मैंने यह चालू किया है.

सवाल-मरने से डर नहीं लगता ?

जवाब-खूब डोज लेता हूं सांस लेनी पड़ती है. खतरा तो है, पर अब लत लग गई है.

सवाल-घर वाले डांटते नहीं हैं?

जवाब-घर वालों को ाी शक नहीं होता. एक डेढ़ घंटा सुरूर रहता है. महक नहीं आती है.

सवाल-और कौन-कौन लेता है ऐसा नशा?

जवाब- स्कूल और रेलवे स्टेशन के आसपास वाले बच्चे खूब लेते हैं. मेरे साथ चलो मिलवाता हूं.

सवाल-यह तो हेल्थ के लिए खतरनाक है.

जवाब- होगा खतरनाक, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. आपको भी लेना है क्या सुरूर? थोड़ा दूं.

सवाल-किसी का डर नहीं है?

जवाब-सुपरमैन हूं, किसी से नहीं डरता. रिकार्डिग होते देखा तो बोला और कर लो रिकॉर्डिग.