-हाईकोर्ट ने कहा, सरकार की कार्यप्रणाली चिंताजनक

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क्कन्ञ्जहृन्: पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पहले से ही बहुत बदनाम हो चुकी है. इसकी बदनामी राष्ट्रीय स्तर पर हो चुकी है. इसके बावजूद स्थायी चेयरमैन नियुक्त नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. मुख्य न्यायाधीश मुकेश आर शाह एवं न्यायाधीश डा. रवि रंजन की दो सदस्यीय खंडपीठ ने अरुण कुमार शर्मा की लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के कार्यकलाप पर गहरी चिंता जाहिर की. अदालत ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के अन्दर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में स्थायी चेयरमैन नियुक्त करने का निर्देश दिया है. 18 सितंबर तक कोर्ट को बताना होगा कि नये चैयरमैन को नियुक्त कर लिया गया है. बताते चलें कि पटना के प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर ही परीक्षा समिति के चेयरमैन बने हुए हैं. सुनवाई के दौरान अधिवक्ता नन्द लाल कुमार सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा पहले भी नियमित चेयरमैन बहाल करने का निर्देश दिया गया था. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार न्यायालय की अवमानना कर रही है. जवाब में अपर महाधिवक्ता आशुतोष रंजन पाण्डेय ने कहा कि परीक्षा समिति में स्कैम हो गया था जिसके चलते आयुक्त को इन्चार्ज बनाया गया. जवाब में कोर्ट ने कहा कि इन्चार्ज के आ जाने से क्या स्कैम रुक गया?