- खादी महोत्सव के उद्धाटन समारोह में बोले सीएम

- पैसों की कमी नहीं इच्छाशक्ति की है कमी

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LUCKNOW : खादी स्वदेशी और स्वावलंबन का प्रतीक है. गांधीजी के इसी मिशन को घर-घर तक पहुंचाना है. पहले लोग झोला लेकर बाजार जाते थे, लेकिन पॉलिथीन के आ जाने से लोग झोले की जगह पॉलिथीन का इस्तेमाल करने लगे. जो पर्यावरण के लिहाज से नुकसानदायक था इसलिए इसपर बैन लगाया गया. उन्होंने हस्तशिल्प कारीगरी को बढ़ावा देने के लिए यूनिवर्सिटी बनाने की बात कही, जहां पर 6 से 12 माह तक का सर्टीफिकेट कोर्स चलाया जाएगा. विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को इससे जोड़ा जाएगा. ये बातें गुरुवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने कही. वह इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में खादी महोत्सव का उद्घाटन पर बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने खादी लोगो और टोल-फ्री समाधान सेंटर का उद्घाटन किया. उनके साथ केंद्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह और प्रदेश खादी मंत्री सत्यदेव पचौरी भी मौजूद थे.

दोबारा शुरू होंगी कंबल मिल

सीएम ने बताया कि माटी कला बोर्ड का गठन किया गया है ताकि मिट्टी से जुड़े सामानों को प्रोत्साहन मिले. इसके अलावा गोवंश आश्रय के लिए हर जिले को 1.20 करोड़ दिये. वास्तव में पैसों की कमी नहीं है, लेकिन इच्छाशक्ति की कमी है. गांव में बायो गोबर गैस को बढ़ावा मिले तो खेती में डीजल की निर्भरता कम होगी. इससे सालाना 2 लाख करोड़ की बचत भी होगी. इसके अलावा प्रदेश के 1 करोड़ 77 लाख स्कूली बच्चों को जो कपड़े-मोजे व जूते दिए जाते हैं अगर उसे प्रदेश में ही महिला स्वयंसेवी संस्था बनाने का काम करें तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. इसके अलावा प्रदेश में बंद पड़ी कंबल मिल को दोबारा शुरू किया जाएगा.

महिलाओं को मिले बढ़ावा

केंद्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि पहले पर्यावरण के मसले पर कोई ध्यान नहीं देता था. आज पानी सर के ऊपर से निकल गया तब बात करने लगे हैं. कांग्रेस ने केवल गांधी का नाम इस्तेमाल किया है बल्कि उनकी नीतियों को दफना दिया है. केवल पीएम मोदी ही है जिन्होंने उनकी नीतियों को आगे बढ़ाया है. मैकेंजी ने बताया कि चीन ने 42 प्रतिशत महिलाओं को रोजगार दिया, जिससे उनकी जीडीपी आगे बढ़ी. हमें भी यह काम करना होगा क्योंकि अभी केवल 25 प्रतिशत महिलाओं के हाथों में रोजगार है. उन्होंने कहा कि आज का युवा आईएएस तो बनना चाहता है, लेकिन एग्रो-साइंटिस्ट नहीं बनना चाहता. खाना सबको चाहिए, लेकिन कोई खेती नहीं करना चाहता है. इसलिए हमारा मकसद है कि खेती से लोगों को जोड़ा जाये. खादी को एंटरप्रेन्योरशिप से जोड़ना है ताकि रोजगार बढ़े.

खादी को महंगा नहीं सर्वसुलभ बनाएंगे

प्रदेश खादी मंत्री सत्यदेव पचौरी ने कहा कि बिल्लौर में खादी पार्क बनेगा जहां 300 चरखें लगेंगे. लोगों को वहां पर ट्रेनिंग देंगे. इसके अलावा सोलर चरखों पर भी छूट दे रहे हैं. यूपी में खादी महंगी नहीं सर्वसुलभ करेंगे. इसके साथ हरित खादी, नाबार्ड और खादी बोर्ड के बीच समझौता तो वहीं खादी बोर्ड और यूएनईपी के बीच सोलर उर्जा को लेकर समझौता किया गया.