-पीयू की सेंट्रल लाइब्रेरी में रखी गई है अवधी और कैथी भाषा में लिखी दुर्लभ रामायण

श्चड्डह्लठ्ठड्ड@द्बठ्ठद्ग3ह्ल.ष्श्र.द्बठ्ठ

क्कन्ञ्जहृन्: पटना यूनिवर्सिटी का सेंट्रल लाइब्रेरी दुर्लभ पांडुलिपियों का एक प्रमुख संग्रह है. लेकिन रामायण जैसे धार्मिक महत्व के पांडुलिपि सहित कई पंाडुलिपियों के विवरण को जानना अबूझ पहेली बन गया है. इस बारे में जब दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने पड़ताल की तो यह बात सामने आयी. सन् 1698 में अवधी और कैथी भाषा में लिखी रामायण यहां सुरक्षित है लेकिन इस बडे़ लाइब्रेरी में कैथी भाषा के जानकार का अभाव है. नतीजतन करीब साढे़ तीन सौ साल पुराने धरोहर से आज की पीढ़ी अवगत नहीं हो पा रही है.

संग्रहालय से आते हैं विशेषज्ञ

पटना यूनिवर्सिटी के सेंट्रल लाइब्रेरी में कैथी ही नहीं अन्य भाषा के पांडुलिपियों के जानकार नहीं है. सेंट्रल लाइब्रेरी के डायरेक्टर डॉ रवींद्र कुमार ने बताया कि यहां पांडुलिपियों को पढ़ने के लिए पटना संग्रहालय से विशेषज्ञ आते हैं. जब तक वे नहीं आते हैं इसके बारे में कुछ बता पाना कठिन है. इसके अलावा इसका संरक्षण के कड़े नियम हैं. यह लाइब्रेरी का एक बिल्कुल अलग ही सेक्शन है.

कभी था प्रचलन में, आज गुमनाम

16वीं सदी के दौरान बिहार के प्रमुख स्थानीय भाषाओं में कैथी का नाम लिया जाता था. लेकिन आज की ग्लोबलाइज्ड व‌र्ल्ड में इसका प्रचलन ही समाप्त हो गया है. इसके कारण आम लोग इस भाषा में लिखे पुराने पांडुलिपियों को नहीं जान पा रहे. पटना म्यूजियम के असिस्टेंट प्रोजेक्ट को-आर्डिनेटर (एमआरसी एंड एमसीसी) विभाष कुमार ने बताया कि यह तब उच्च वर्ग की भाषा हुआ करता था. लेकिन अब यह प्रचलन में नहीं है.

दुर्लभ और क्षेत्रीय महत्व का विषय

विशेषज्ञ विभाष कुमार ने बताया कि सन् 1698 में अवधी ओर कैथी भाषा में लिखी गई रामायण दुर्लभ है. क्योंकि रामायण तो कई भाषाओं में लिखे गए हैं और ये आज सामान्य रूप से लोगों के बीच सुलभ भी हैं. लेकिन कैथी भाषा में लिखी रामायण बिहार को छोड़ कहीं और उपल?ध नहीं है. इसलिए यह अपने आप में एक दुर्लभ धरोहर में सम्मान योग्य है. इसलिए इसे बिहार की पहचान से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए.

विभिन्न प्रसंगों का रोचक जिक्र

अवधी भाषा में लिखी रामायण पंडित ब्रह्मानंद के द्वारा लिखी गई है. इसमें कुल तीन अध्याय है. यह कैलीग्राफी में लिखी गई है. इसमें रावण के द्वारा सीता के हरण और उसके विलाप का वर्णन किया गया है. इसके अलावा भगवान राम के साथ वनवास के दौरान प्रसंगों का भी जिक्र किया गया है.

विशाल संग्रह 14 कर्मियों पर

सेंट्रल लाइब्रेरी से मिली जानकारी के अनुसार यहां दो लाख 75 हजार पुस्तकें रखी हैं. यहां चार हजार पांडुलिपियां भी यहां संग्रहीत की गई है. इसके अलावा यहां दैनिक अखबार, पत्रिका और रिसर्च सेक्शन की भी किताबें हैं. लेकिन इस विशाल लाइब्रेरी का संचालन मात्र 14 कर्मचारियों के भरोसे किया जाता है. बताया जाता है कि यहां रामायण के साथ इस्लाम से भी संबंधित कई पांडुलिपियों को संरक्षित किया गया है.

यहां पटना म्यूजियम से विशेषज्ञ आते है उसके द्वारा पांडुलिपियां पढ़ी जाती है. यहां कैथी भाषा के विशेषज्ञ नहीं है.

-डॉ रवींद्र कुमार,

डायरेक्टर सेंट्रल लाइब्रेरी, पीयू