हिन्दुस्तानी एकेडेमी में कार्यसमिति और कार्य परिषद के गठन की कवायद तेज

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ALLAHABAD: हिन्दी और उर्दू साहित्य के उन्नयन के सबसे बड़े केन्द्र हिन्दुस्तानी एकेडेमी में बदलाव की बयार दिखाई देने लगी है. शासन से एकेडेमी में अध्यक्ष की नियुक्ति किए जाने के बाद एकेडेमी में पुरस्कारों की श्रृंखला का आगाज हो चुका है. अब एकेडेमी की सर्वोच्च बॉडी कार्यसमिति और कार्यपरिषद के गठन की भी कवायद तेज कर दी गई है. एकेडेमी अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह की ओर से जून के अंतिम सप्ताह में इसे लेकर तीन दर्जन से अधिक नामों की लिस्ट शासन के भाषा विभाग के पास भेजी गई है.

बसपा सरकार ने किया था भंग

करीब ग्यारह वर्ष के बाद एकेडेमी की कार्यपरिषद और कार्यसमिति अस्तित्व में आने जा रही है. इसे वर्ष 2007 में तत्कालीन बसपा सरकार की मुखिया मायावती ने भंग कर दिया था. इसके बाद से अब तक एकेडेमी कार्यसमिति और कार्यपरिषद के बगैर संचालित हो रही थी.

भेजे गए 49 विद्वानों के नाम

एकेडेमी के अध्यक्ष डॉ. सिंह की ओर से कार्यसमिति और कार्य परिषद का गठन किए जाने को लेकर देश भर के विश्वविद्यालयों और डिग्री कालेजों के कुल 49 शिक्षकों व साहित्यकारों के नाम भाषा विभाग की स्वीकृति के लिए भेजे गए हैं. इनमें से कार्यपरिषद के लिए 40 और कार्यसमिति के लिए नौ नाम लिस्ट में शामिल किए गए हैं.

कार्यसमिति का अधिकार

- कर्मचारियों की नियुक्ति व बर्खास्तगी, भविष्य निधि के लिए दिए गए ऋण की वसूली व पुरस्कारों की राशि का निर्धारण करना

- किसी को नौकरी से अलग करने का अधिकार और किसी भी कर्मचारी को अवकाश देने का अधिकार

- कार्यसमिति परिषद के नीति संबंधी निर्णयों को कार्यान्वित करेगी और एकेडेमी के कार्यो के परिपालन की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी.

- कार्यसमिति की किसी बैठक में उपस्थित सदस्यों के बहुमत का निर्णय ही कार्यसमिति का निर्णय माना जाएगा.

कार्यपरिषद का अधिकार

- परिषद नीति संबंधी समस्त सामान्य प्रश्नों का एकेडेमी के उद्देश्यों के अनुकूल समाधान करेगी

- अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष परिषद और कार्यसमिति की बैठकों का सभापतित्व करेगा

- परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ही क्रमश: कार्यसमिति के भी पदेन अध्यक्ष व उपाध्यक्ष होंगे

एकेडेमी के संव‌र्द्धन के लिए कार्यसमिति और कार्यपरिषद के गठन का प्रयास किया गया है, जो करीब ग्याहर वर्षो से भंग पड़ी हुई थी. शासन को दोनों बॉडी के गठन से संबंधित विद्वानों का नाम भेजा गया है.

डॉ. उदय प्रताप सिंह, अध्यक्ष, हिन्दुस्तानी एकेडेमी