हैकर्स ने सबसे बड़ी बैंक चोरी को दिया अंजाम
यूं तो भारत के तमाम शहरों में होने वाली एटीएम लूट और चोरी की घटनाएं तो अख़बारों से लेकर TV तक छाई रहती हैं, लेकिन रूस के कुछ हैकर्स ने इतनी बड़ी एटीएम चोरी को अंजाम दिया है जो सबको हैरान कर देगा। मॉस्को में मौजूद एक सिक्योरिटी फर्म के हवाले से बताया जा रहा है कि रूस के कुछ हैकर्स ने अमेरिका और रूस समेत कई देशों के करीब 18 बैंकों से 10 मिलियन डॉलर की भारी भरकम रकम चुरा ली है। हैकर्स ने इसके लिए इंटरबैंक ट्रांसफर सिस्टम का अपना हथियार बनाया है। यह दुनिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी और अनोखी एटीएम चोरी है।

हैकर्स ग्रुप का नाम है MoneyTaker
ऑनलाइन फ्रॉड की जांच करने वाली फेमस कंपनी Group-IB ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि पहला अटैक साल 2016 में हुआ था जिसमें अमेरिका के सबसे बड़े बैंक के मैसेजिंग सिस्टम STAR नेटवर्क पर अटैक किया गया था और इस साइबर हमले में 5000 से ज्यादा एटीएम का डाटा लीक होने के बात सामने आई थी। Group-IB कंपनी ने बताया है कि इस हैकर ग्रुप का नाम है 'मनी टेकर' क्योंकि हैकर्स ने इतनी बड़ी चोरी करने के लिए जिस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है उसका नाम भी यही है। कंपनी का दावा है कि उन्होंने उन 18 बैंकों की पहचान कर ली है जिनके ATM द्वारा यह चोरी की गई है। इनमें से 10 बैंक अमेरिका के हैं, दो बैंक रूस में, एक बैंक ब्रिटेन में है। इसके अलावा भी कई बड़ी फाइनेंस और लॉ कंपनियां भी में इस हैकिंग में निशाना बनी हैं।

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हर ATM ट्रांजेक्‍शन में चुराए 5 लाख डॉलर
Group-IB की रिपोर्ट कहती है कि इन हैकर्स ने जितने बार में इतनी बड़ी चोरी की, उसका अगर एवरेज निकाले तो पता चलेगा कि उन्होंने हर एक घटना के दौरान ATM से करीब 5लाख डॉलर उड़ाए हैं। Group-IB का दावा है कि हैकर्स बैंक के मैसेंजिंग नेटवर्क स्टार में डायरेक्ट सेंध नहीं लगा पाए लेकिन उन्होंने इस नेटवर्क से जुड़े तमाम छोटे संस्थानों की सिक्योरिटी को तोड़कर उसके डेटाबेस में जगह बना ली।

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कैसे हुई इतनी बड़ी चोरी
रिपोर्ट बताती है कि MoneyTaker का नाम के इन हैकर्स ने सबसे पहले इन बैंकों के इंटर्नल डेटाबेस में घुसपैठ की जिससे उन्हें हजारों की संख्या में ATM कार्ड का डेटा हासिल हो गया। इसके बाद इन हैकर्स ने बैंकों द्वारा लगाए गए एंटीवायरस को बाईपास करने के लिए एक ऐसे टूल का इस्तेमाल किया जो लगातार अपनी लोकेशन बदल कर दिखाता था जिससे कि उन्हें आसानी से ट्रेस नहीं किया जा सका। कोई भी साइबर स्पेशलिस्ट इन हैकर की लोकेशन को ट्रैक ना कर सके इसके लिए इन हैकर्स ने माइक्रोसॉफ्ट और याहू के अलावा बैंक ऑफ अमेरिका तक के ऑनलाइन सिक्योरिटी सर्टिफिकेट का दुरुपयोग किया।

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