जिनेवा (पीटीआई)। बच्चों को खतरनाक बीमारी से बचाने के लिए किये गए प्रयास के रूप में अफ्रीका के मलावी में दुनिया का पहला मलेरिया वैक्सीन लॉन्च किया गया है। बता दें कि इस बीमारी से हर साल वैश्विक स्तर पर 435,000 से अधिक मौतें होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मलावी सरकार के ऐतिहासिक पायलट कार्यक्रम का स्वागत किया है। दुनिया का पहला और एकमात्र मलेरिया वैक्सीन का नाम 'आरटीएस, एस' रख गया है और इसे 2 साल तक के बच्चों को दिया जाएगा। डब्ल्यूएचओ ने एक बयान में कहा कि घाना और केन्या भी आने वाले हफ्तों में ऐसी ही एक वैक्सीन पेश करेंगे।

भारत में भी होती हैं ज्यादा मौतें
बता दें कि मलेरिया दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है, यह हर दो मिनट में एक बच्चे की जान लेती है। इनमें से ज्यादातर मौतें अफ्रीका में होती हैं, जहां हर साल 250,000 से ज्यादा बच्चे बीमारी से मर जाते हैं। डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत में 89 प्रतिशत मलेरिया के मामले हैं। राष्ट्रीय वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीबीडीसीपी) के अनुसार, भारत में 2016 के दौरान मलेरिया के 1,090,724 मामले दर्ज किये गए और इससे 331 मौतें हुईं। पांच साल से कम उम्र के बच्चों को इस बीमारी से मरने का सबसे ज्यादा खतरा होता है। दुनिया भर में, मलेरिया से एक साल में 435 000 लोगों की जान जाती है, जिनमें से ज्यादातर बच्चे होते हैं।

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वैक्सीन को बनाने में लगे 30 साल

डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर टेड्रो अदनोम घेब्रेयियस ने कहा, 'हमने पिछले 15 सालों में मलेरिया को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय निकाले लेकिन कुछ नहीं हुआ। हमें मलेरिया की प्रतिक्रिया को ट्रैक पर लाने के लिए नए समाधानों की आवश्यकता है और यह नया टीका हमें वहां पहुंचने के लिए एक आशाजनक उपकरण देता है। मलेरिया वैक्सीन में हजारों बच्चों को बचाने की क्षमता है।' बता दें कि इस वैक्सीन को बनाने में 30 साल लगे हैं।

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