कानपुर। हर वर्ष की तरह इस साल भी आज के दिन यानी कि 11 जुलाई को दुनिया भर में विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जा रहा है। वर्ल्ड पॉपुलेशन डे मनाने का मुख्य उद्देश्य  दुनियाभर में बढ़ती जनसंख्या के प्रति लोगों को जागरुक करना है। इस दिन लोगों को परिवार नियोजन, लैंगिक समानता और मानवाधिकार के बारे में बताया जाता है। इस दिन कई जगहों पर अनेक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। इनमें जनसंख्या बढ़ोतरी के चलते होने वाली समस्या को लेकर लोगों को आगाह किया जाता है। बता दें कि विश्व जनसंख्या दिवस 1989 से ही मनाया जा रहा है।

2030 तक दुनिया की आबादी 860 करोड़
संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, घटती फर्टिलिटी के बावजूद हर साल 8.3 करोड़ आबादी बढ़ जाती है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2030 तक दुनिया की आबादी 860 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। पिछले साल संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि 2050 तक दुनिया की संभावित 68 प्रतिशत आबादी शहरी क्षत्रों में रहने लगेगी। आज उत्तर अमेरिका की 82 प्रतिशत, लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई की 81 प्रतिशत, यूरोप की 74 प्रतिशत और ओशिनिया की 68 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में है।    

भारत की सिर्फ 35 प्रतिशत आबादी रहेगी शहरों में
पिछले साल संयुक्त राष्ट्र ने बताया था कि एशिया में शहरीकरण का स्तर अब 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। हालांकि अफ्रीका अभी भी इन सभी देशों से अलग है क्योंकि यहां की ज्यादातर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में है, इस देश की सिर्फ 43 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है। 2018 से लेकर 2050 तक के बीच सिर्फ तीन देशों की आबादी का शहरों में 35 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। उन देशों में भारत, चीन और नाइजीरिया शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 2050 तक भारत की 416 मिलियन, चीन की 255 मिलियन और नाइजीरिया की 189 मिलियन आबादी का शहरों में रहने का अनुमान है।

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