उद्योगों की मांग, तेजी चाहिए तो सरकार र्इंधन मूल्यों पर दे ध्यान
नर्इ दिल्ली (पीटीआर्इ)।
पेट्रोल-डीजल के मूल्यों में लगातार बढ़ोतरी से मर्इ में महंगार्इ दर बढ़कर 14 महीनों में सबसे ज्यादा 4.43 प्रतिशत पर पहुंच गर्इ है। उद्योगों की मांग है कि उत्पादन में बढ़ोतरी चाहिए तो सरकार को र्इंधन कीमतों पर ध्यान देना होगा। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआर्इ) पर आधारित महंगार्इ पिछले साथ अप्रैल में 3.18 प्रतिशत आैर मर्इ में 2.26 प्रतिशत पर थी। बृहस्पतिवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मर्इ 2018 में खाद्य पदार्थों पर आधारित महंगार्इ दर 1.60 प्रतिशत पर थी। यह दर अप्रैल में 0.87 प्रतिशत पर थी।

दालों की महंगार्इ घटी जबकि फल-सब्जी की महंगार्इ में बढ़ोतरी
प्रेट्रोल-डीजल वाले र्इंधन आैर ऊर्जा पर आधारित महंगार्इ दर मर्इ में बढ़कर 11.22 प्रतिशत पर पहुंच गर्इ जबकि अप्रैल में यह 7.85 प्रतिशत पर थी। यह बढ़ोतरी कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्घि के दबाव में घरेलू बाजार में र्इंधन के दाम में आर्इ तेजी से हुर्इ। आलू की महंगार्इ 81.93 प्रतिशत होने के साथ सब्जियों पर आधारित महंगार्इ बढ़कर 2.51 प्रतिशत पहुंच गर्इ। फलाें की महंगार्इ बढ़कर 15.40 प्रतिशत पर पहुंच गर्इ जबकि दालों की महंगार्इ घट कर 21.13 प्रतिशत पर आ गर्इ। पिछले साल 2017 में थोक महंगार्इ मार्च के दौरान थोक महंगार्इ दर 5.11 प्रतिशत पर थी।

पेट्रोल-डीजल ने बढ़ाया अायात बिल, एक्सचेंज रेट पर असर
इंडस्ट्री चेंबर एसोचैम ने सरकार से बढ़ती र्इंधन दरों को देखने के लिए आग्रह किया है। उसका कहना है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण आयात बिल पर असर पड़ रहा है। इससे एक्सचेंज रेट प्रभावित हो रहा है। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा कि उद्योगों की लागत बढ़ रही है। एेसा तब हो रहा है जब इंडस्ट्री पर पहले से ही लाभ को लेकर दबाव बना हुआ है। आर्इसीआरए की प्रिंसिपल इकोनाॅमिस्ट अदिति नैय्यर ने कहा कि मर्इ में थोक महंगार्इ दर 4.4 प्रतिशत पर पहुंच गर्इ है जबकि एक महीने पहले यह 3.6 प्रतिशत पर थी। इससे लागत बढ़ेगी आैर रुपये में कमजोरी आएगी।

डीजल के दाम बढ़े, तो सब्जियां महंगी

महंगाई की डोज झेलने का रहिए तैयार

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