मरीजों के रजिस्टर्ड नंबरों पर नहीं पहुंच रहे एसएमएस

मेरा अस्पताल पर पिछड़ रहा जिला अस्पताल

Meerut. जिला अस्पताल की सेवाओं को लेकर मरीजों से मेरा अस्पताल पर लिया जाने वाला फीडबैक दर्ज ही नहीं हो पा रहा है. वजह, यहां आने वाले अधिकतर मरीजों की ओर से दर्ज होने वाले मोबाइल नंबर गलत निकल रहे हैं, जिसके चलते पोर्टल पर इन नंबर्स को इनवैलिड करार दिया जा रहा है. ऐसे में पोर्टल के जरिए मिलने वाली ग्रेडिंग में अस्पताल पिछड़ता जा रहा है.

यह है योजना

सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली सुविधा को लेकर मरीजों का फीडबैक जानने के लिए पीएम मोदी ने खुद यह योजना शुरू की है. इसके तहत मेरा अस्पताल वेब पोर्टल पर मरीजों का मोबाइल नंबर दर्ज कर उनसे ऑनलाइन फीडबैक मांगा जा रहा है. इसके आधार पर ही अस्पताल को ग्रेडिंग मिलनी है. बेहतर गे्रडिंग वाले हॉस्पिटल्स को शासन की ओर से पुरस्कार दिया जाएगा, जबकि खराब ग्रेडिंग होने पर हॉस्पिटल में सुधार के प्रयास किए जाएंगे.

1500 से 2000 मरीज रोजाना जिला अस्पताल की ओपीडी में आते हैं.

200 से 250 मरीज अस्पताल में एडमिट होते हैं.

3 आप्शन में मरीज अपना फीड बैक दे सकते हैं. अत्यंत संतोषजनक, संतोषजनक, असंतोषजनक

2 अंक अत्यंत संतोषजनक, 1 अंक संतोषजनक, -1 अंक असंतोषजनक के लिए दिया जाएगा.

200 प्रतिशत, 100 प्रतिशत और - 100 प्रतिशत के आधार पर अस्पतालों का रैकिंग मिलेगी.

मार्च 2018 से अस्पताल में शुरु हुई थी यह सुविधा

मेडिकल कॉलेज और जिला महिला अस्पताल में ई-हॉस्पिटल शुरू न होने की वजह से यह सुविधा अभी मरीजों को नहीं मिल रही है.

यह है प्रक्रिया

ओपीडी में पर्चा बनवाने के दौरान मरीज से मोबाइल नंबर मांगा जाता है.

सभी मोबाइल नंबर्स को मेरा अस्पताल से लिंक किया जाता है.

रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मरीजों को फीड बैक के लिए एसएमएस भेजा जाता है.

दिए गए नंबर पर हॉस्पिटल की सेवाओं को लेकर मरीज अपना फीडबैक दे सकता है.

अस्पताल की रैकिंग का पूरा डाटा गोपनीय रखा जाता है. अधिकतर मरीजों के मोबाइल नंबर गलत निकल रहे हैं. ऐसे में हम लगातार मरीजों को इस संबंध में जागरूक कर रहे हैं, ताकि इस सुविधा का लाभ सभी को मिल सके और अस्पताल की सही स्थिति का पता लगाया जा सके.

डॉ. बीपी कल्याणी, ई-हॉस्पिटल इंचार्ज, जिला अस्पताल