manish.mishra@inext.co.in

PATNA: पेट्रोल पंप पर तेल के खेल को लेकर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के पास लगातार शिकायत आ रही थी. लोगों का आरोप था कि पेट्रोल पंपों पर तेल का एक बड़ा खेल चल रहा है. हर गाड़ी में तेल कम और पैसे अधिक लिया जा रहा है. जबकि ग्राहकों को अधिकार है कि वह पेट्रोल पंप पर कोई शक होने पर 50 एमएल से 5 लीटर तक के मापक यंत्र मांगकर उससे तेल ले सकते हैं. इस अधिकार को जांचने के लिए दैनिक जागरण आई नेक्स्ट का रिपोर्टर एक आम आदमी बनकर राजधानी के पेट्रोल पंपों पर घूमा. कुछ पंप ने नियमों का पालन करते हुए मापक यंत्र दिखाए और तेल देने को तैयार हो गए लेकिन अधिकांश पंपों ने मापक यंत्र दिखाने से ही मना कर दिया. कम्प्लेन बुक मांगने पर मारपीट पर उतर आए. पढि़ए, आपके अधिकारों को किस तरह पंप पर डंप किया जा रहा है.

पंप संचालक ने दबंगई से कहा केबिन से बाहर निकाल दो इसे

रिपोर्टर बुद्धा कॉलोनी स्थित मेसर्स आर एन अग्रवाल एंड संस पेट्रोल पंप पर पहुंचा. वहां एक लीटर पेट्रोल नोजल से न लेकर मापक यंत्र से देने की बात कही तो सेल्समैन ने साफ इनकार कर दिया. काफी रिक्वेस्ट के बाद भी वह कंपनी से मना होने की बात कहकर टालता रहा. इसकी शिकायत करने जब रिपोर्टर संचालक के केबिन में पहुंचा तो वहां बैठे सभी लोग काफी उग्र हो गए और नौबत मारपीट की आ गई. न तो उन्होंने कम्प्लेन बुक दिया और न ही कोई शिकायत सुनी. यही नहीं रिपोर्टर को धक्के मारकर केबिन से बाहर निकालने की बात कही. आप भी देखिए किस तरह से आम आदमी से पंप संचालक कैसे करते हैं बर्ताव.

रिपोर्टर - सर, मुझे एक लीटर पेट्रोल लेना है और मैने मापक यंत्र से देने की बात कही तो आपका सेल्समैन मना कर रहा है.

संचालक - एक लीटर का कोई मेजरमेंट नहीं है, पांच लीटर तेल लीजिए फिर मेजरमेंट हो जाएगा.

रिपोर्टर - मुझे 5 नहीं 1 लीटर मेजरमेंट करके चाहिए.

संचालक - आप एक लीटर का मापक खुद खरीदकर लाइए और उस पर बाट माप विभाग से मुहर लगवा कर आइए तब उसमें दे देंगे.

रिपोर्टर - यह तो कोई बात नहीं हुई, हमारा अधिकार है और हमारी सुविधाओं के लिए नियम बनाया गया है

संचालक - आप जैसे लोगों से हमारा पंप नहीं चलता है आप जाइए आपको पेट्रोल नहीं दूंगा.

रिपोर्टर - पंप के लिए नियम है तो पालन कीजिए.

संचालक - आपको जहां जाना है जाइए, जहां शिकायत करना है करिए, सीएम से लेकर राज्यपाल तक जाइए मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है.

रिपोर्टर - आप कम्प्लेंट बुक तो दे दीजिए हम अपनी पीड़ा लिख दें.

संचालक - यहां से निकल आजो, यह मेरा केबिन है यहां तुम आ कैसे गए,..इसे बाहर निकालो जल्दी से.

रिपोर्टर - आप दबंगई क्यों कर रहे हैं हम तो अधिकार की बात कर रहे हैं.