मानकों की उड़ रही धज्जियां, ओवरलोड और खटारा वाहनों से बच्चे जा रहे स्कूल

Meerut. गुरुवार को कुशीनगर में बच्चों से भरी स्कूल की वैन के ट्रेन से टकराने पर 13 मासूमों की जान चली गई. देश की राजधानी दिल्ली में भी एक अन्य हादसे में एक स्कूली बच्ची की मौत हो गई. इन हादसों के बाद दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम ने अपने शहर में स्कूली वाहनों की स्थिति खंगाली तो हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई. शहर में स्कूली वाहन बेखौफ हो निर्देशों को ताक पर रख बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं. खटारा ऑटो में लिमिट से ज्यादा बच्चे बैठाएं जा रहे हैं. जबकि स्कूली बसों में भी सीट से ज्यादा बच्चे भरे हुए हैं.

स्कूल बसों के िलए निर्देश

बसों के आगे-पीछे स्कूल बस लिखा होना चाहिए.

स्कूली बसों में फ‌र्स्ट-एड बॉक्स लगा होना चाहिए.

बस में फॉयर सेफ्टी सिस्टम लगा होना चाहिए.

अगर एजेंसी से बस कॉन्ट्रेक्ट पर हो तो उस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए.

सीट लिमिट से अधिक बच्चे स्कूली वाहन में नहीं होने चाहिए.

स्कूल वाहन में हॉरिजेंटल ग्रिल (जालियां) लगी होनी चाहिए.

स्कूली वाहन पीले रंग के होने चाहिए, जिसके बीच में नीले रंग की पट्टी पर स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा होना चाहिए.

बसों के दरवाजे को अंदर से बंद करने की व्यवस्था होनी चाहिए .

बस में सीट के नीचे बैग रखने की व्यवस्था होनी चाहिए.

बसों में टीचर जरुर होने चाहिए, जो बच्चों पर नजर रखें.

ड्राइवर के लिए जरूरी

प्रत्येक बस चालक को कम से कम 5 साल तक भारी वाहन चलाने का अनुभव हो.

किसी भी ड्राइवर को रखने से पहले उसका वैरिफिकेशन जरूरी है.

ड्राइवर या कंडक्टर के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं होना चाहिए.

ड्राइवर व कंडक्टर मेडिकली फिट होने चाहिए.

ड्राइवर या कंडक्टर के लिए यूनिफार्म निर्धारित हैं. स्कूली बसों में जीपीएस, फोन की सुविधा भी होनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट और प्रशासन की ओर से स्कूलों के लिए जो भी निर्देश हैं उनका पूर्णत पालन किया जा रहा है. पैरेंट्स प्राइवेट व्हीकल हायर करते हैं, उसमें हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते.

राहुल केसरवानी, अध्यक्ष, सहोदय

कुशीनगर में हुए हादसे को लेकर दुख है. स्कूली बसों के लिए हमने सभी निर्धारित मानक पूरे किए हुए हैं. बसों में किसी प्रकार की कोई अनियमितताएं नहीं हैं.

विशाल जैन, डायरेक्टर, शांति निकेतन विद्यापीठ

स्कूल ट्रांसपोर्टेशन का चार्ज बहुत ज्यादा हैं. ट्रांसपोर्ट आसानी से मिलता भी नहीं हैं. इसी व्यवस्था में काम चलाना पड़ रहा है.

गौरव वर्मा, पैरेंट्स

स्कूल संचालक किसी न किसी मद में वसूली ही करते रहते हैं. बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना बहुत मुश्किल हाे गया है.

टिवंकल सिंह, पैरेंट्स

स्कूलों को बस अपने मुनाफे से मतलब है, बच्चों की सेफ्टी से उनका कोई लेना-देना नहीं हैं.

सुकन्या, पैरेंट्स

बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल कोई जिम्मेदारी नहीं लेते हैं. हमारी मजबूरी है बच्चों को पढ़ाना है तो स्कूलों के नियम मानने पड़ते हैं.

हरविंदर सिंह, पैरेंट्स

स्कूल वैन और ऑटो में ड्राइवर बच्चों को ठूंस-ठूंस कर लाते हैं. स्कूली वाहन आसानी से मिलते नहीं हैं.

शुयैब, पैरेंट्स

स्कूल जोन

बिना हेलमेट व चार पहिया वाहनों पर लगा ब्रेक

जाम से निजात दिलाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने उठाया कदम

हेलमेट लगाने के बारे में स्कूली छात्रों को दी पुलिस ने जानकारी

ट्रैफिक पुलिस ने सदर क्षेत्र के स्कूलों को चिंहित करते हुए वहां पर बिना हेलमेट दोपहिया और चौपहिया वाहनों की एंट्री पर बे्रक लगा दिया. बावजूद इसके जबरदस्ती करने वालों के चालान भी काटे गए.

जाम से बचाव

ट्रैफिक पुलिस के टीएसआई मो. नदीम व दीनदयाल दीक्षित के साथ 10 ट्रैफिक पुलिसकर्मी दोपहर 12 बजे करीब सदर क्षेत्र के स्कूलों जोन पर पहुंचे. यहां जीटीबी, डीपीएस व एसडी कॉलेज के सामने बैरियर लगाकर चेकिंग अभियान चलाया. इस दौरान बिना यहां से बिना हेलमेट गुजरने वाले वाहन चालकों का रास्ता रोक दिया गया. चौपहिया वाहनों की एंट्री पर भी रोक लगा दी गई. जिस किसी ने भी जबरदस्ती की उसका चालान काटा गया. दूसरी ओर सोफिया व सेंट जोंस स्कूलो के पास ट्रैफिक पुलिस ने बिना हेलमेट दोपहिया व चौपहिया वाहनों पर रोक लगा दी.

नहीं लगा जाम

स्कूलों के बाहर ट्रैफिक पुलिस द्वारा बिना हेलमेट दोपहिया व चौपहिया वाहनों की एंट्री बेन करने से वहां पर जाम की समस्या खत्म हो गई. पुलिस ने दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक यह अभियान चलाया.

यह अभियान पंद्रह दिन लगातार चलाया जाएगा. स्कूल जोन में दोपहर 12 बजे से दो बजे तक बिना हेलमेट वाहन चालकों व चौपहिया वाहनों पर बेन लगा गया है.

मौ. नदीम, टीएसआई