दैनिक जागरण आई नेक्स्ट द्वारा नेशनल यूथ डे पर युवा मंच कार्यक्रम का किया गया आयोजन

वाद-विवाद प्रतियोगिता में आरक्षण के मुद्दे पर युवाओं ने रखे विचार

Meerut. 'ये कटु सत्य है कि आरक्षण समाज को विभिन्न हिस्सों में बांटने का नाम बन चुका है, जिसके परिणाम ये हैं कि हम देश के विकास को खो रहे हैं'. यह कहना था आरक्षण के मुद्दे पर अधिकतर युवाओं का. दरअसल, नेशनल यूथ डे के अवसर पर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की ओर से सीसीएसयू की लाइब्रेरी में युवा मंच का आयोजन किया गया. इस दौरान आयोजित डिबेट कॉम्पटीशन में युवाओं ने आरक्षण के मुद्दे पर अपने विचार रखे. कार्यक्रम के अंत में डिबेट कॉम्पटीशन में विजेताओं को प्राइज और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित भी किया गया.

बदल गया आरक्षण का अर्थ

इस दौरान बतौर मुख्य अतिथि उप पुस्कालय अध्यक्ष डॉ. जमाल असलम सिद्दीकी रहे. डिबेट कॉम्पटीशन में स्टूडेंट गगन ने कहा कि देश के विकास की बाधा आरक्षण है. कई महत्वपूर्ण और टैलेंट्ड लोग आरक्षण की वजह से ही पीछे हैं. दरअसल, आरक्षण अपनी उपयोगिता खो रहा है. वहीं इसी मुद्दे पर अनुसुईया ने कहा कि जिस उद्देश्य के लिए आरक्षण की शुरूआत हुई थी, आज राजनीति ने उसका अर्थ ही बदल दिया है. पहले आरक्षण कमजोर तबके व महिलाओं को बराबरी के लिए दिया गया था, लेकिन राजनीति के दौर में संपन्न वर्ग भी आरक्षण में आ रहे हैं.

संरक्षण के लिए आरक्षण

स्टूडेंट मयंक सिंह ने कहा कि आरक्षण की मूल महत्ता को समझना जरुरी है. वंचित और उपेक्षित तबकों के संरक्षण के लिए आरक्षण की जरूरत महसूस की गई थी. ताकि वो भी समाज की मुख्यधारा में आ सकें. मगर आज सोचने की जरुरत है कि आरक्षण का पैमाना तय कैसे करें, अगर आय से करते हैं तो उसके भी फर्जी सर्टिफिकेट दिखाए जाते हैं. वहीं, मोनू ठाकुर ने कहा कि आरक्षण का आधार जातीय न होकर आर्थिक स्तर पर तय होना चाहिए. सामान्य वर्ग में भी ऐसे गरीब हैं, जो फीस न दे पाने के कारण पढ़ नहीं पाते हैं. पवन ने कहा कि सामान्य वर्ग के छात्र 70 प्रतिशत अंक लाकर भी बैठे रहते हैं, वहीं, आरक्षण के कारण 33 प्रतिशत अंक पाकर युवक अधिकारी बन जाते हैं. इससे साफ है कि जातिवाद पर राजनीति हो रही हैं. देवेंद्र हुण ने कहा कि आरक्षण किसी एक जाति का मुद्दा नहीं है बल्कि ये देश के विकास का मुद्दा है. इसलिए जिसमें टैलेंट हो उसे ही आगे लाना चाहिए, जातिवाद बेकार है.

ये रहे विनर

मयंक, गगन, अनुसुईया.

देश के कई महत्वपूर्ण एग्जाम में आरक्षण नहीं बल्कि प्रतिभा का आंकलन किया जाता है, जिससे प्रतिभावान अभ्यर्थी ही उपयुक्त पद पर पहुंचते हैं. मेरे हिसाब से हर एग्जाम में ऐसा होना चाहिए.

देवेंद्र हुण, स्टूडेंट

जातिवाद को लेकर आरक्षण की बात करना सहीं नहीं, अगर हम आरक्षण की बात न करें और टैलेंट की बात करें तभी वास्तविक विकास संभव है.

रोबिन कुमार, स्टूडेंट

सोचने की आवश्यकता है कि आज आरक्षण समाज में बुराईयों व राजनीति को बढ़ावा देने के अलावा कुछ भी नहीं है. वास्तव में जो टैलेंट रखते हैं, वो पीछे रह जाते हैं.

मयंक, स्टूडेंट

आरक्षण का 70 प्रतिशत ही लोग फायदा उठा पा रहे हैं जबकि 30 फीसदी लोग आज इस महत्वपूर्ण व्यवस्था से वंचित हैं.

गगन, स्टूडेंट

इस तरह के कार्यक्रमों में स्टूडेंट्स को प्रतिभाग करते रहना चाहिए. युवा मंच वो मंच है, जहां यूथ को अपनी बात रखने का मौका मिलता है.

डॉ. जमाल असलम सिद्दीकी, उप पुस्तकालय अध्यक्ष, सीसीएसयू

कार्यक्रम के माध्यम से यूथ को अपनी बात को रखने का मौका मिला, ये बहुत अच्छी बात है. इस तरह के कार्यक्रम होते रहने चाहिए जो यूथ को प्रोत्साहित करते हैं.

डॉ. प्रशांत कुमार, प्रेस प्रवक्ता, सीसीएसयू

'युवाओं के लिए प्रेरणा थे विवेकानंद'

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा स्वामी विवेकानंद जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में मनाया. कार्यक्रम का आयोजन यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग में हुआ. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रजिस्ट्रार ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव रहे. मुख्य वक्ता विद्यार्थी परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. मनोज अग्रवाल रहे. कार्यक्रम अध्यक्ष सोसायटी की डिप्टी रजिस्ट्रार सुभाष सिंह, महानगर अध्यक्ष डॉ. राजकुमार सिंह, महानगर मंत्री अंबर अग्रवाल ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया. मौके पर डॉ. मनोज अग्रवाल ने कहा कि विद्यार्थी परिषद एक विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन है, जो स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मानते हुए उनके विचारों को युवाओं के अंदर भरने का कार्य करता है. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने दो चीजों पर ज्यादा ध्यान दिया. एक युवाओं पर और दूसरा व्यक्ति निर्माण पर क्योंकि आने वाले समय में युवा ही देश का भविष्य होंगे.

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में मंच का संचालन प्रशांत पटेल ने किया. प्रदेश कार्यालय प्रमुख उत्तम सैनी, प्रदेश कोषाध्यक्ष रविंद्र गोयल, राहुल विकल यूनिवर्सिटी परिक्षेत्र सहसंयोजक, हंस चौधरी, अंकित स्वामी, प्रतीक कुमार, रोहित आंनद, अभिषेक मौर्य, जतिन लिसाड़ी, सुषमा पाल, सिमरन कर्दम, अंजलि चौधरी, डोली, रोहन यादव आदि रहे.

समरसता यज्ञ में यजमान बने सफाई कर्मचारी

स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर सीसीएसयू में साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद द्वारा आयोजित समरसता यज्ञ में मुख्य वक्ता सुरेंद्र कुमार ने कहाकि स्वामी विवेकानंद युवाओं प्रेरणा पुंज हैं.

युवाओं को सीखने की जरुरत

प्रति कुलपति व साहित्यिक साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद की अध्यक्ष प्रो. वाई विमला ने कहा कि स्वामी विवेकानंद केजीवन से युवाओं को बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वीसी प्रो. एन.के. तनेजा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अपने 39 वर्ष के छोटे से जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य किए.विश्वविद्यालय में महापुरुषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया. यज्ञ में मुख्य यज्ञमान विश्वविद्यालय के सफाई कर्मचारी रहे. कार्यक्रम का संचालन साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद की उप समिति के संयोजन डॉ. रूप नारायण ने किया. समंवयक डॉ. विघ्नेश कुमार ने सभी का धन्यवाद किया. इस दौरान प्रो. योगेंद्र सिंह, प्रो. वीरपाल, प्रो. यशवेंद्र वर्मा आदि मौजूद रहे.

प्रदर्शनी में देखा स्वामी विवेकानंद का जीवन दर्शन

सीसीएसयू राजा महेंद्र प्रताप पुस्तकालय द्वारा शानिवार को स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर तीन दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. जिसमें स्वामी विवेकानंद द्वारा लिखित एवं उनके जीवन वृत्तांत एवं साहित्य से जुड़ी पुस्तकें प्रदर्शनी में रखी गई. प्रदर्शनी में स्वामी विवेकानंद द्वारा लिखित लगभग 70 बुक्स प्रदर्शित की गई.

बताया कौन से विवेकानंद

प्रदर्शनी का शुभारंभ वीसी प्रो. एन.के. तनेजा ने फीता काटकर किया. उन्होंने इस दौरान स्वामी विवेकानंद के जीवन पर प्रकाश डाला. जिसके बाद पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. जमाल अहमद सिद्दीकी ने स्वामी विवेकानंद के साहित्य पर प्रकाश डाला तथा अतिथियों का आभार व्यक्त किया. मौके पर प्रतिकुलपति प्रो. वाई विमला, प्रो. सुधीर शर्मा, प्रो. आलोक आदि ने स्वामी विवेकानंद को पुष्पांजलि अर्पित की. मौके पर रत्ना मिश्रा, कृष्ण कुमार, डॉ. सुभाष चंद्रा, विजय लक्ष्मी, तरुण कुमार, डीपी भट्ट, प्रवीण कुमार, सुमन लता, मनोज कुमार, ममता यादव, नीतू आदि का योगदान रहा.