-ग्राहकों को खुद का पैसा वापस नहीं कर रहा जिला सहकारी बैंक

-बैंक अधिकारियों का जवाब-अभी आर्थिक स्थिति है बहुत खराब

GORAKHPUR: जिला सहकारी बैंक के अजीबो-गरीब नियम के कारण उपभोक्ता परेशान हैं. कैश की किल्लत का बहाना बनाकर उपभोक्ताओं को खुद का पैसा नहीं दिया जा रहा है. सिर्फ कार्यालय का चक्कर लगवाया जा रहा. अधिकारियों का कहना है कि बैंक में कैश की कमी के कारण 2016 से पहले जमा रकम के एकमुश्त भुगतान पर रोक लगा दी गई है. जिन लोगों को शादी या बीमारी के लिए पैसे चाहिए उनकी जरूरतों का विशेष ख्याल रखा जा रहा है. सरकार जिस हिसाब से पैसा दे रही है उसी अनुपात में ग्राहकों को भी पैसा दिया जा रहा.

केस-1

62 साल के सरवन ने छह साल पहले जमीन बेचकर चरगांवा के जिला सहकारी बैंक में करीब 6 लाख रुपए जमा कराया था. सोचा था भविष्य में जब जरुरत होगी, पैसा निकाल लेंगे. स्वास्थ्य खराब होने पर 2017 में उन्हें पैसों की जरूरत पड़ी तो बैंक ने पैसा देने से मना कर दिया. कर्मचारियों ने बताया कि एक महीने में अधिकतम 20 हजार रुपए ही दे सकते हैं. सरवन सात महीने से अलग-अलग उच्चाधिकारियों के सामने गुहार लगा चुके हैं, पर टुकड़ों में उन्हें अभी तक 1.5 लाख मिल सका है.

केस-2

52 वर्षीय नारद सिंह के जिला सहकारी बैंक पनियरा की शाखा में करीब आठ लाख रुपए जमा हैं. गाड़ी खरीदने के लिए वह पैसे निकालना चाहते हैं लेकिन बैंक कैश की कमी का हवाला दे रहा है. सिंह को बैंक ने जून 2017 में 50 हजार रुपए दिए थे. तब से अभी तक वह पैसों की मांग कर रहे हैं, लेकिन नहीं मिल रहा है.

पांच प्रतिशत या एक हजार का भुगतान

अधिकारियों का कहना है कि कैश की कमी के कारण लखनऊ से भुगतान संबंधी गाइडलाइन जारी की गई है. जिला सहकारी बैंक की ओर से 2016 से पहले जमा कैश का 5 प्रतिशत या अधिकतम एक हजार रुपए का मासिक भुगतान किया जा रहा है. जबकि, 2016 के बाद जो कैश जमा किए गए हैं उनका ऑन डिमांड भुगतान किया गया है. गाइडलाइन के अनुसार, शादी के लिए कुल जमा का 50 प्रतिशत या 50 हजार रुपए का भुगतान किया जा रहा है. इसके अलावा बीमारी की स्थिति में कस्टमर को सीडीओ की अध्यक्षता में गठित समिति के सामने आवेदन करना होगा. समिति के आदेश पर बैंक पैसा देगा.

2012 में रद्द हो गया था लाइसेंस

जिला सहकारी बैंक की खराब आर्थिक स्थिति के कारण आरबीआई ने 2012 में इसके लाइसेंस को रद्द कर दिया था. काफी प्रयास के बाद 2016 में आरबीआई ने बैंक को फिर से काम करने की अनुमति दी. इसके बाद से बैंक खुद को स्थापित करने के साथ ही ग्राहकों को नई सुविधाएं देने के लिए भी काम कर रहा है. हाल बैंक ने पेपर वर्क से खुद को मुक्त करते हुए ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार किया है.

एनपीए 82 करोड़, नहीं हो रही वसूली

जिला सहकारी बैंक का कुल एनपीए 82 करोड़ तक पहुंच गया है. जिले में बैंक की 178 समितियों में से अधिकांश निष्क्रिय हो चुकी हैं. इन सभी पर बैंक का कुछ न कुछ बकाया है. जुलाई में बोर्ड के सदस्यों की मीटिंग में एनपीए की वसूली के लिए चार सदस्यों की समिति का गठन किया गया था. लेकिन विशेष अधिकार नहीं होने के कारण अभी तक इसकी वसूली नहीं हो पाई है.

वर्जन

बैंक आर्थिक समस्याओं से तेजी से उभर रहा है. बैंक ने पिछले चार महीने में 82.96 लाख शार्ट टर्म लोन बांटे हैं. कैश भुगतान शासन के गाइडलाइन के अनुसार किया जा रहा है. जल्द बैंक बेहतर स्थिति में होगा.

आशुतोष, एजीएम, जिला सहकारी बैंक

बैंक में कैश की समस्या को एक हद तक दूर कर लिया गया है. कस्टमर्स के भुगतान, उन्हें जोड़ने के अलावा बैंक आधुनिक सेवाओं के विस्तार पर भी काम कर रहा है. 15 सितंबर के बाद से हम कैश भुगतान की सीमा को बढ़ाएंगे.

आन्नद वर्धन पाठक, सचिव, जिला सहकारी बैंक